बिहार में अब जलमार्ग से होगा बालू-सीमेंट का परिवहन, मास्टर प्लान तैयार

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: बिहार में माल परिवहन की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है। अब भारी ट्रकों से लदी सड़कों की जगह नदियाँ माल ढुलाई का नया माध्यम बनेंगी। गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी प्रमुख नदियों को कमर्शियल ट्रांसपोर्ट रूट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे सड़क यातायात का बोझ काफी हद तक कम होगा।

केरल के कोच्चि में आयोजित ‘इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल’ की बैठक में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बिहार के सात राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास की विस्तृत योजना रखी। उन्होंने बताया कि जलमार्ग परिवहन न केवल किफायती है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित होगा। इस योजना के तहत नदियों के किनारे औद्योगिक हब और अत्याधुनिक टर्मिनल विकसित किए जाएंगे, जिससे बिहार की सीधी कनेक्टिविटी वैश्विक बाजारों और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से स्थापित होगी।

परिवहन मंत्री ने बताया कि जलमार्ग से माल ढुलाई की लागत केवल 1.3 रुपये प्रति टन किलोमीटर है, जो सड़क और रेल परिवहन की तुलना में काफी कम है। बालू, सीमेंट और स्टोन चिप्स जैसे भारी सामान जहाजों के माध्यम से ढोए जाने से सड़कों पर 30 से 40 प्रतिशत तक ट्रैफिक कम होगा। इससे पुलों और सड़कों को होने वाले नुकसान में भी बड़ी राहत मिलेगी।

सोनपुर के कालूघाट में विकसित किया जा रहा मल्टीमॉडल टर्मिनल इस पूरी योजना का अहम केंद्र होगा। सालाना 77 हजार कंटेनरों की हैंडलिंग क्षमता वाले इस टर्मिनल पर एक साथ दो बड़े मालवाहक जहाजों के ठहरने की सुविधा होगी। इसके साथ ही यहां बन रहा लॉजिस्टिक पार्क जल, रेल और सड़क, तीनों माध्यमों को जोड़ते हुए सुरक्षित भंडारण की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।

सरकार की इस पहल से नदियों के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे और आईडब्ल्यूटी टर्मिनलों के जरिए स्थानीय कारोबार को मजबूती मिलेगी। साथ ही नेपाल के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से बिहार में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

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