शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर देशभर में भक्त मां की आराधना कर सुख-समृद्धि, शक्ति और भय से मुक्ति की कामना करते हैं। राजधानी पटना में नवरात्र को लेकर उत्साह चरम पर है। शहर के बोरिंग रोड, बेली रोड, डाकबंगला चौराहा और एतवारपुर समेत कई इलाकों में आकर्षक और भव्य दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किए गए हैं। इन पंडालों को देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों की तर्ज पर सजाया गया है।
पटना में आकर्षण का केंद्र बने भव्य पूजा पंडाल
एतवारपुर में ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 121 फीट और चौड़ाई 120 फीट है। इस आकर्षक संरचना को तैयार करने में करीब 80 कारीगरों ने योगदान दिया है।वहीं, डाकबंगला चौराहे पर खजुराहो मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया है। इसकी ऊंचाई करीब 80 फीट और चौड़ाई 55 फीट है।
कैलाश पर्वत और दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की झलक
बेली रोड स्थित खाजपुरा शिव मंदिर के पास कैलाश पर्वत की थीम पर पंडाल बनाया गया है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई करीब 55-55 फीट है। इसकी सजावट में रावण को कैलाश पर्वत उठाते हुए दर्शाया गया है। साथ ही भगवान राम और हनुमान जी से जुड़ा दृश्य भी आकर्षण का हिस्सा है।इसी तरह मीठापुर नहर स्थित डॉ. अनीता सिंह अस्पताल के पास दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। इन पंडालों में धार्मिक आस्था के साथ कलात्मकता और कारीगरों की मेहनत की झलक देखने को मिल रही है।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं। उन्हें नवदुर्गा का सातवां स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालु विश्वास के साथ उनकी पूजा कर नकारात्मकता से रक्षा, साहस और सुख-शांति की कामना करते हैं।मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाने की परंपरा है। नवरात्र के सातवें दिन ग्रे यानी स्लेटी रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है। यह रंग धैर्य, संयम और संतुलन का प्रतीक है।
मां कालरात्रि का पूजा मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
महाष्टमी पर होगी मां महागौरी की पूजा
वहीं नवरात्र के आठवें दिन महाष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन विशेष श्रृंगार पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी महत्व है। अष्टमी व्रत और पारण का समय निर्धारित करने के लिए संबंधित वर्ष के पंचांग और स्थानीय पूजा समिति की सूचना का पालन करना चाहिए।नवरात्र के दौरान पटना के प्रमुख पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। भव्य सजावट, मंदिरों की अनूठी प्रतिकृतियां और धार्मिक आयोजन इस बार दुर्गा पूजा को खास बना रहे हैं।