NEWS PR डेस्क : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होने हैं । चार सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार, जिनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं, की जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। वहीं, पांचवीं सीट पर आरजेडी की नजर है, लेकिन उसे आसानी से हासिल नहीं हो पाएगी।
बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट पर विपक्ष की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जरूरत के मुताबिक विधायकों की संख्या होने के बावजूद आरजेडी और उसके सहयोगी विपक्षी दल इस सीट को हासिल करने में असफल नजर आ रहे हैं। इसका बड़ा कारण उनके नेतृत्व की रणनीतिक गलती और दूरदर्शिता की कमी माना जा रहा है। वर्तमान हालात में या तो आरजेडी की नीतियां दोषी हैं या नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ‘भस्मासुर’ जैसी भूमिका ही विपक्ष को कमजोर बना रही है। यही वजह है कि 41 विधायकों की मौजूदगी के बावजूद विपक्ष कमजोर और लाचार दिख रहा है। आइए समझते हैं कि किस तरह तेजस्वी यादव ने विपक्ष के लिए यह चुनौती पैदा की।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एआईएमआईएम की स्थिति
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एआईएमआईएम की कोशिश थी कि उसे बीजेपी की ‘बी टीम’ के आरोपों से मुक्त किया जा सके। इसके लिए उसे राजद के साथ गठबंधन करना था। लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम उस समय भूल गए कि 2020 में उनके पांच विधायकों में से चार को राजद में शामिल किया जा चुका था।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उस समय एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष को खाली हाथ लौटा दिया। चर्चा थी कि एआईएमआईएम ने 15 सीटों की डिमांड की थी, लेकिन तेजस्वी यादव तैयार नहीं हुए। उन्होंने बिहार की यात्रा के दौरान यह मान लिया था कि इस बार सत्ता की चाबी उनके हाथ में होगी। इस ओवर कॉन्फिडेंस ने गठबंधन को गड़बड़ कर दिया।
एआईएमआईएम के सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम एक बार फिर तेजस्वी यादव के पास गए और इस बार छह सीटों की मांग की। लेकिन तेजस्वी यादव ने इसे भी ठुकरा दिया, जिससे अख्तरुल इमाम खाली हाथ लौट गए।
विधानसभा चुनाव परिणाम
2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने जोरदार प्रदर्शन किया। राजद को 25 सीटों पर जीत मिली, जबकि एआईएमआईएम पांच सीटों पर सीमित रह गया। कई जगह राजद उम्मीदवारों की हार में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों द्वारा काटे गए वोट निर्णायक साबित हुए। अगर उस समय समझौता हो गया होता, तो राजद को राज्यसभा में उम्मीदवार भेजने के लिए विधायकों के गणित पर इतनी चिंता नहीं करनी पड़ती।
राज्यसभा चुनाव और एआईएमआईएम का पैंतरा
अब जब राज्यसभा चुनाव नजदीक हैं, एआईएमआईएम ने पैंतरा बदला। पहले उसने राजद से समर्थन मांगा, लेकिन बात नहीं बनी। फिर उसने राजद उम्मीदवार को समर्थन देने की शर्त रखी कि उसे एक एमएलसी की सीट मिले, लेकिन यह शर्त विवादित रही।
अभी एआईएमआईएम के पास दो विकल्प बचे हैं: या तो एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन दे या चुनाव से खुद को अलग कर ले। इन दोनों विकल्पों से एनडीए को लाभ मिलने के पूरे संकेत हैं, जबकि विपक्ष की चुनौती और बढ़ गई है।