NEWS PR डेस्क : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र आज खत्म होगा। समापन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार सदन को जानकारी देंगे कि सत्र के दौरान कितने विधेयक पारित किए गए और सदस्यों द्वारा कितने प्रश्न उठाए गए।
बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का आज आखिरी दिन है और राजनीतिक तौर पर इसे बेहद अहम माना जा रहा है। पूरे सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस, हंगामा और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तार से चर्चा हुई। आज समापन दिवस पर गैरसरकारी संकल्पों के अलावा कुछ प्रमुख विधेयकों पर भी विचार-विमर्श और निर्णय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी जाएगी।
इस बजट सत्र की शुरुआत राज्य सरकार द्वारा नए वित्तीय वर्ष का बजट पेश करने के साथ हुई थी। इसके बाद विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा, कटौती प्रस्तावों पर बहस, प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जरिए जनहित के मुद्दे उठाए गए। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास योजनाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने बजट को विकास केंद्रित बताते हुए अपनी नीतियों का बचाव किया।
समापन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार पूरे सत्र का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करेंगे। वे बताएंगे कि कुल कितनी बैठकें हुईं, कितने विधेयक पेश और पारित किए गए, तथा प्रश्नकाल के दौरान कितने तारांकित और अतारांकित प्रश्न पूछे गए। साथ ही ध्यानाकर्षण, शून्यकाल सूचनाओं और स्थगन प्रस्तावों का विवरण भी सदन के पटल पर रखा जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार कई ऐसे विधेयक पारित हुए जिनका संबंध प्रशासनिक सुधार, वित्तीय प्रबंधन और जनकल्याणकारी योजनाओं से है। कुछ प्रस्तावों पर विपक्ष ने संशोधन भी सुझाए, लेकिन अधिकांश विधेयक बहुमत के आधार पर पारित कर दिए गए। गैरसरकारी संकल्पों के माध्यम से विधायकों ने अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को भी मजबूती से उठाया।
सत्र के दौरान कई बार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हुई और विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए विरोध जताया। हालांकि अध्यक्ष के हस्तक्षेप से कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की कोशिश की गई। कई बार सर्वदलीय सहमति से सार्थक चर्चाएं भी हुईं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सक्रियता को दर्शाती हैं।
आज के समापन दिवस पर सभी दलों की नजर अध्यक्षीय वक्तव्य पर टिकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे सत्र की उत्पादकता और सरकार-विपक्ष की भूमिका का आकलन स्पष्ट होगा।
सत्र की समाप्ति के साथ विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी जाएगी। इसके साथ ही बजट सत्र का औपचारिक अंत हो जाएगा, लेकिन इस दौरान लिए गए फैसलों और उठाए गए मुद्दों का असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह बजट सत्र महत्वपूर्ण निर्णयों, तीखे राजनीतिक टकराव और जनहित से जुड़े सवालों के कारण यादगार रहा। अब आगे की राजनीतिक दिशा और सरकार की कार्ययोजना पर सबकी निगाहें रहेंगी।