NEWS PR डेस्क: भारतीय राजनीति में आज जब शब्दों का शोर, आरोप-प्रत्यारोप और तात्कालिक लाभ की होड़ आम होती जा रही है, ऐसे समय में नितिन नवीन जैसे नेता शालीनता और संतुलन की राजनीति की याद दिलाते हैं। उनका राजनीतिक सफर इस बात का प्रमाण है कि संयम, अनुशासन और सधे हुए कदम आज भी राजनीति में आगे बढ़ने का भरोसेमंद रास्ता हो सकते हैं।
नितिन नवीन का उदय किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं बल्कि लंबे समय तक संगठन में काम करने, धैर्य रखने और सही समय पर सही भूमिका निभाने की प्रक्रिया का नतीजा है। छात्र राजनीति से लेकर विधायक और मंत्री तक का उनका सफर बताता है कि वे राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि सेवा और संगठन के प्रति समर्पण मानते रहे हैं।
उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी शालीन भाषा और मर्यादित व्यवहार है। वे न तो तीखे बयान देकर सुर्खियां बटोरते हैं और न ही विरोधियों पर व्यक्तिगत प्रहार को अपनी रणनीति बनाते हैं। मुद्दों पर तथ्यपरक और संतुलित बात रखना उनकी शैली रही है। यही कारण है कि वे अपने दल के भीतर ही नहीं बल्कि राजनीतिक विरोधियों के बीच भी एक संयमित और भरोसेमंद नेता के रूप में स्वीकार किए जाते हैं।
भाजपा जैसे अनुशासित संगठन में नितिन नवीन की प्रगति यह दर्शाती है कि संगठन आज भी उन नेताओं को महत्व देता है जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठनात्मक मर्यादा को रखते हैं। उन्होंने हर जिम्मेदारी को बिना विवाद, बिना जल्दबाज़ी और बिना अनावश्यक प्रदर्शन के निभाया। यही “सधे राजनीतिक कदम” उनकी निरंतर प्रगति का आधार बने।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी उनकी कार्यशैली अपेक्षाकृत शांत लेकिन परिणाम देने वाली रही। बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़े विषयों पर उन्होंने प्रचार से अधिक कार्यान्वयन पर ध्यान दिया। यह रवैया आज की राजनीति में दुर्लभ होता जा रहा है, जहां अक्सर योजनाओं से अधिक उनका प्रचार हावी रहता है।
नितिन नवीन का राजनीतिक आचरण विशेष रूप से युवा नेताओं के लिए एक संदेश है। यह संदेश कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए केवल आक्रामकता या तेज़ बयानबाज़ी ही रास्ता नहीं है। धैर्य, शालीनता और संगठन के प्रति निष्ठा भी उतनी ही प्रभावी राजनीतिक पूंजी हो सकती है।
आज जब राजनीति में भरोसे का संकट गहराता जा रहा है, नितिन नवीन जैसे नेताओं की उपस्थिति यह उम्मीद जगाती है कि मर्यादित और जिम्मेदार राजनीति अभी समाप्त नहीं हुई है। यदि यही संतुलन और संयम उनके भविष्य के राजनीतिक सफर में भी बना रहा, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वे आने वाले समय में और बड़ी भूमिकाओं के लिए स्वाभाविक विकल्प के रूप में देखे जाते रहेंगे।
आलेख: मुरली मनोहर श्रीवास्तव (वरिष्ठ स्तम्भकार एवं लेखक)