बिहार रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास, दानापुर में वीर शहीदों को किया गया नमन

Rashmi Tiwari

दानापुरः बिहार रेजिमेंटल सेंटर, दानापुर के इतिहास में 15 अक्टूबर का दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर बिहार रेजिमेंट की दो बटालियनों 9 बिहार और 14 बिहार तथा 4 राष्ट्रीय राइफल्स का स्थापना दिवस उत्साह, गौरव और सैन्य परंपराओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वीर स्मृति स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

9 बिहार बटालियन की स्थापना 15 अक्टूबर 1965 को दानापुर में मेजर एस के शर्मा के नेतृत्व में हुई थी। स्थापना के छह महीने पूरे होने से पहले ही बटालियन में लेफ्टिनेंट कर्नल जे एस घराया के नेतृत्व में मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में तैनात हो गई। वहां बटालियन ने उत्कृष्ट कार्य करते हुए देश की उत्तर-पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

14 बिहार बटालियन की स्थापना 15 अक्टूबर 1977 को झांसी में लेफ्टिनेंट कर्नल ए. आर. के. रेड्डी के नेतृत्व में हुई थी। इस बटालियन में बिहार, झारखंड और ओडिशा के सैनिक शामिल थे। स्थापना के कुछ समय बाद बटालियन को देहरादून में तैनात किया गया, जहां सैनिकों ने विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी सैन्य दक्षता और पेशेवर क्षमता को और मजबूत किया।

इसके अतिरिक्त, 4 राष्ट्रीय राइफल्स की स्थापना 15 अक्टूबर 1990 को जबलपुर में कर्नल रोहिताश राजपाल के नेतृत्व में हुई थी। बटालियन ने जम्मू-कश्मीर में तैनाती के के दौरान सराहनीय कार्य किया और आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने तथा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन तीनों बटालियनों के वीर बिहारी सैनिकों ने अपने अदम्य साहस, शौर्य, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से देशसेवा की गौरवशाली परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। विभिन्न सैन्य अभियानों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने रेजिमेंट का गौरव बढ़ाया है। उनकी वीरता और विशिष्ट सेवाओं के लिए सैनिकों तथा बटालियनों को समय-समय पर विभिन्न वीरता पुरस्कारों और प्रशस्ति-पत्रों से सम्मानित किया गया है।

इस अवसर पर वीर स्मृति स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बिहार रेजिमेंट केंद्र के उपसमादेष्टा कर्नल विजय कुमार, लेफ्टिनेंट कर्नल समरजीत शर्मा सहित अनेक अनेक सैन्य अधिकारियों एवं सूबेदार मेजर नारायण प्रधान, सूबेदार कुमार अजीत सहित कई सरदार साहिबान एवं अन्य पद शामिल हुए।

सभी ने मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके अदम्य साहस, त्याग एवं बलिदान को नमन किया। यह अवसर न केवल तीनों बटालियनों की गौरवशाली सैन्य यात्रा का स्मरण करने का था, बल्कि देश की रक्षा के प्रति समर्पण, रेजिमेंटल एकता और वीर बिहारी सैनिकों की अटूट प्रतिबद्धता को पुनःसंकल्पित करने का भी प्रतीक बना।

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