NEWS PR डेस्क: बिहार की राजधानी पटना में अब आंदोलनों और धरना-प्रदर्शनों का केंद्र बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। गर्दनीबाग धरनास्थल की वजह से जूझ रही ट्रैफिक व्यवस्था और स्थानीय लोगों की परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ) के पास नया धरनास्थल विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
प्रशासन ने इसके लिए दूजरा मौजे में करीब दो एकड़ जमीन चिह्नित की है। अधिकारियों का मानना है कि गंगा किनारे स्थित यह खुला इलाका धरना-प्रदर्शन के लिए ज्यादा उपयुक्त होगा और इससे शहर की मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।
वर्तमान में गर्दनीबाग धरनास्थल के कारण सिविल सर्जन कार्यालय, गर्दनीबाग अस्पताल और आसपास के रिहायशी इलाकों में अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। कई मौकों पर पुलिस को इस पूरे रूट पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ती है। विधानसभा सत्र के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं, जब प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में विधानसभा की ओर मार्च करते हैं।
हाल ही में जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने एसडीएम, एडीएम और यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गर्दनीबाग धरनास्थल का निरीक्षण किया था। इसके बाद दूजरा मौजे में प्रस्तावित नए स्थल का भी जायजा लिया गया। डीएम स्तर से अंचलाधिकारी से जमीन की स्थिति और स्वामित्व को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
गौरतलब है कि पटना में धरनास्थल का स्थान पहले भी कई बार बदला जा चुका है। 1999 से पहले धरनास्थल हड़ताली मोड़ के पास था, जहां नेहरू पथ पर लगातार जाम लगता था। न्यायालय के आदेश के बाद इसे आर ब्लॉक शिफ्ट किया गया। 1999 से 2014 तक आर ब्लॉक धरनास्थल रहा, लेकिन हार्डिंग रोड में बस स्टैंड होने के कारण यहां भी यातायात की समस्या बढ़ गई। 2014 में हाईकोर्ट के निर्देश पर धरनास्थल को गर्दनीबाग लाया गया, जो अब एक बार फिर अव्यवहारिक साबित हो रहा है।
जिला प्रशासन का मानना है कि मरीन ड्राइव के पास नया धरनास्थल बनने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ज्यादा सुचारु होगी और प्रदर्शनकारियों को भी एक स्थायी, खुला और बेहतर स्थान मिलेगा। जमीन से जुड़ी रिपोर्ट आने के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।