NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में राज्य सवर्ण आयोग ने सरकार को व्यापक सिफारिशें भेजी हैं। आयोग का कहना है कि राज्य में सामान्य वर्ग की एक बड़ी आबादी आर्थिक संकट से जूझ रही है, जिसे लक्षित सहायता की जरूरत है।
25 प्रतिशत से अधिक आबादी आर्थिक रूप से कमजोर
बिहार सवर्ण आयोग की समीक्षा बैठक में सामने आया कि सामान्य वर्ग की करीब 25.09 प्रतिशत आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है। इनमें से लगभग 49.07 प्रतिशत लोगों की मासिक आय 10 हजार रुपये से कम बताई गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस वर्ग की बदहाली दूर करने के लिए जमीन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए।
भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन देने का प्रस्ताव
आयोग ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि भूमिहीन गरीब सवर्ण परिवारों को बासगीत के लिए 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें स्थायी आवास मिल सके। आयोग का कहना है कि सिर पर छत उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही जिलाधिकारियों को निर्देशित करने की सिफारिश की गई है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनाने में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर कर शत-प्रतिशत पात्र लाभुकों को प्रमाणपत्र जारी किया जाए।
ईडब्ल्यूएस नियमावली में सुधार की जरूरत
बैठक में यह भी पाया गया कि वर्तमान Economically Weaker Section (EWS) reservation नियमावली में कुछ विसंगतियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग और राजस्व विभाग से समन्वय स्थापित करने की बात कही गई है। सभी प्रमंडलों से मिले फीडबैक के आधार पर आयोग ने जिलों से लंबित और अस्वीकृत ईडब्ल्यूएस आवेदनों का ब्योरा भी मांगा है, ताकि पात्र लोगों को लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
आयु सीमा बढ़ाने और मुफ्त कोचिंग की मांग
युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आयोग ने प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार, सामान्य वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा 40 वर्ष और महिलाओं के लिए 45 वर्ष की जानी चाहिए। इसके अलावा, गरीब सवर्ण छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग और अलग छात्रावास की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया गया है, ताकि आर्थिक तंगी उनकी शिक्षा में बाधा न बने।
केंद्र के 10% आरक्षण का लाभ जमीन पर उतारने पर जोर
आयोग अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा, जब राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद सहित अन्य सदस्यों ने भी सामाजिक संतुलन और आर्थिक न्याय के लिए इन सिफारिशों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन प्रस्तावों पर क्या निर्णय लेती है।