पश्चिम बंगाल SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई,32 साल बाद वकील के रूप में दिखेंगी ममता बनर्जी

Amit Singh

NEWS PR डेस्क:  सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अहम सुनवाई शुरू हो रही है। इस मामले में सभी की निगाहें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर टिकी हैं, जो करीब तीन दशक बाद किसी केस में खुद पैरवी करती नजर आ सकती हैं।

SIR प्रक्रिया को लेकर ममता का कड़ा विरोध:

फायरब्रांड राजनीति के लिए पहचानी जाने वाली ममता बनर्जी वोटर लिस्ट से जुड़ी SIR प्रक्रिया का लगातार विरोध करती रही हैं। इससे पहले उन्होंने बिहार में लागू SIR पर आपत्ति जताई थी और अब पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट में कौन करेगा सुनवाई:

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ सुनवाई करेगी। ममता बनर्जी के साथ-साथ मोस्तारी बानू, टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन द्वारा दाखिल याचिकाओं सहित अन्य याचिकाओं पर भी एक साथ विचार किया जाएगा।

32 साल बाद ममता खुद पेश कर सकती हैं दलील:

सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी कोर्ट में मौजूद रह सकती हैं और अपनी दलीलें खुद भी रख सकती हैं। ममता बनर्जी के पास कानून की डिग्री है और अगर वह खुद पैरवी करती हैं तो यह 32 साल बाद होगा। उन्होंने आखिरी बार 10 फरवरी 1994 को पश्चिम बंगाल की जिला अदालत में वकील के रूप में केस लड़ा था, जिसमें 33 आरोपियों को जमानत मिली थी। ममता ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की है और राजनीति में आने से पहले कुछ समय तक वकालत भी की थी।

SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:

गौरतलब है कि 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और इससे किसी भी मतदाता को असुविधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को ग्राम पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में “लॉजिकल विसंगतियों” की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का भी आदेश दिया था।

1.25 करोड़ वोटर्स पर असर का दावा:

2002 की वोटर लिस्ट के आधार पर किए गए वंश लिंकिंग में माता-पिता के नाम में अंतर और उम्र के बेमेल जैसी वजहों से करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं को “लॉजिकल विसंगतियों” की सूची में शामिल किया गया है। ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को इस संबंध में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया है।

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