NEWS PR डेस्क : वैशाली जिले के पटेढ़ी बेलसर प्रखंड में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार होने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर अल्फा जियो कंपनी नगवां-मिश्रौलिया गांव के आसपास इलाके में विस्तृत सर्वेक्षण का काम कर रही है।
वैशाली जिले के पटेढ़ी बेलसर प्रखंड की तस्वीर आने वाले समय में बदल सकती है। नगवां मिश्रौलिया गांव और आसपास के चंवर क्षेत्रों में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और प्राकृतिक गैस मिलने की संभावना को देखते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देश पर अल्फा जियो कंपनी ने बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया है।
कंपनी की टीम नगवां विरमामठ गांव के आसपास बोरिंग कर भूगर्भीय जांच कर रही है। हालांकि खेतों में बिना पूर्व सूचना के खुदाई किए जाने को लेकर कुछ किसानों में नाराजगी भी देखने को मिली। अधिकारियों का कहना है कि यदि यहां तेल या गैस का भंडार मिलता है, तो यह न सिर्फ पटेढ़ी बेलसर प्रखंड बल्कि पूरे बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कंपनी के अनुसार करीब 20 दिन पहले की गई प्रारंभिक जांच से मिले आंकड़ों के बाद संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। फिलहाल प्रखंड के विभिन्न चंवर क्षेत्रों में बोरिंग कर पाइप लगाए जा रहे हैं और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। इस दौरान कुछ स्थानों पर ग्रामीणों और कंपनी कर्मियों के बीच बहस भी हुई, लेकिन बाद में अधिकारियों ने फसल क्षति का मुआवजा देने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
जानकारी के मुताबिक इंडियन ऑयल लिमिटेड से टेंडर मिलने के बाद मुंबई की अल्फा जियो कंपनी तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज पदार्थों की खोज का काम कर रही है। कंपनी के सेक्शन हेड ने बताया कि ONGC के सैटेलाइट सर्वे के आधार पर जमीन में लगभग 100 फीट तक बोरिंग की जा रही है। इसके बाद जमीन के अंदर करीब 25 से 30 फीट की गहराई पर नियंत्रित विस्फोट कर लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में तरंगों के माध्यम से सेस्मिक टेस्टिंग की जाएगी। इस जांच के नतीजों के आधार पर आगे 3डी टेस्टिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2013 में भी इस इलाके में सर्वे किया गया था और करीब दो महीने तक काम चला था, लेकिन उस समय तेल नहीं मिलने के कारण कार्य रोक दिया गया था। अब नए सर्वे में पेट्रोलियम पदार्थों की संभावना मिलने के बाद वैज्ञानिक परीक्षण के बाद गहराई में खुदाई की योजना बनाई जा रही है।
इस परियोजना में अल्फा जियो कंपनी की करीब 1800 सदस्यीय टीम लगी हुई है। अब तक गांव के 80 से अधिक किसानों के खेतों में बोरिंग की जा रही है। बोरिंग के बाद जमीन के नीचे से दो अलग-अलग लेयर के नमूने लिए जाएंगे और जांच के लिए उन्हें देहरादून स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा। बताया गया है कि बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक लगभग 2700 स्थानों को इस सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है।