भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन जी की जयंति, जदयू ट्रेडर्स प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव ने दी श्रद्धांजलि

Patna Desk

NEWSPR डेस्क।  स्वतंत्र भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन जी की आज जयंति है। इस मौके पर जदयू ट्रेडर्स प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने जाकिर हुसैन को नमन करते हुए याद किया।

स्वतंत्र भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन का जन्म 8 फरवरी, 1897 को हैदराबाद में एक संपन्न पठान परिवार में हुआ था। जन्म के कुछ ही वर्ष बाद इनका परिवार हैदराबाद छोड़ उत्तर प्रदेश रहने चला गया था।  जाकिर हुसैन ने युवावस्था में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा इस्लामिया हाई स्कूल, इटावा में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए डॉ. जाकिर हुसैन ऐंग्लो-मुस्लिम ऑरिएंटल कॉलेज, जिसे अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है, गए थे। उन्होंने जर्मनी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पी.एच.डी की डिग्री भी प्राप्त की। डॉ. जाकिर हुसैन का राजनीति के प्रति रुझान कॉलेज के दिनों में ही हो गया था। कॉलेज में उनकी छवि एक प्रभावी छात्र नेता की थी।

मात्र 23 वर्ष की आयु में डॉ. जाकिर हुसैन ने अपने कुछ सहपाठियों और सहयोगियों के साथ मिलकर नेशनल मुस्लिम यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया की नींव रखी थी। 1927 में जब वह भारत लौटे उस समय जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी बंद होने के कगार पर थी. तब उन्होंने इसे बंद होने से रोकने और इसकी दशा सुधारने के लिए इसका संचालन पूर्ण रूप से अपने अधीन कर लिया. अगले 20 वर्षों तक उन्होंने इस संस्थान, जो ब्रिटिश अधीन भारत को स्वराज्य दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा था, को उच्च कोटि की दक्षता प्रदान कराते हुए सुचारू रूप से चलाया. स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद उन्हें जामिया मिलिया इस्लामिया का उपकुलपति नियुक्त किया गया. डॉ.जाकिर हुसैन ने शिक्षा सुधार के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

1956 में वह राज्यसभा अध्यक्ष के रूप में चयनित हुए. लेकिन लगभग एक वर्ष बाद ही 1957 में वह बिहार राज्य के गवर्नर नियुक्त हो गए और राज्यसभा की सदस्यता त्याग दी। उन्होंने इस पद पर 1962 तक कार्य किया। 1962 में वह देश के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए। शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए वर्ष 1963 में डॉ.जाकिर हुसैन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। 3 मई, 1969 को डॉ.जाकिर हुसैन का असमय देहांत हो गया। वह भारत के पहले राष्ट्रपति हैं जिनकी मृत्यु अपने ऑफिस में ही हुई थी।

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