पीएचडी के नए संशोधन पर भड़के युवा, सड़कों पर उतरे छात्र

Puja Srivastav

NEWS PR डेस्क : पीएचडी से जुड़े नए संशोधन को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। विश्वविद्यालय परिसरों से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। छात्रों का आरोप है कि यह संशोधन शोध को प्रोत्साहित करने के बजाय उसे और कठिन बना देगा तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करेगा।

नए संशोधन के तहत पीएचडी में प्रवेश, शोध अवधि, गाइड चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि इसमें प्रवेश की शर्तें ज्यादा कठोर कर दी गई हैं, रिसर्च स्कॉलरशिप को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और गाइड–स्कॉलर अनुपात को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि संशोधन से आरक्षण, फेलोशिप और रिसर्च की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पहले ही पीएचडी करना आर्थिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। नए नियम लागू होने से ग्रामीण, गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और भी दूर हो जाएगी। छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार और नियामक संस्थानों ने यह फैसला छात्रों और शिक्षकों से परामर्श किए बिना लिया है।

दिल्ली, पटना, लखनऊ, इलाहाबाद, हैदराबाद समेत कई विश्वविद्यालयों में छात्र धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाथों में तख्तियां लेकर युवा “संशोधन वापस लो”, “शोध विरोधी नीति नहीं चलेगी” जैसे नारे लगा रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच हल्की झड़प की भी खबर है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर संशोधन वापस नहीं लिया गया या इसमें सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि पीएचडी सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि देश के बौद्धिक भविष्य से जुड़ा सवाल है।

प्रशासन का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य शोध की गुणवत्ता बढ़ाना है, लेकिन छात्रों की मांग है कि गुणवत्ता के नाम पर अवसरों को सीमित न किया जाए। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और संबंधित आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। अब सवाल यह है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनेगी या पीएचडी का यह नया संशोधन युवाओं के सपनों पर भारी पड़ेगा।

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