सुप्रीम कोर्ट में आई ऐसी याचिका, देखते ही भड़क गए CJI सूर्यकांत, लगा दी फटकार

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में VVIP दर्शन व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीनियर वकील विष्णु शंकर जैन ने चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष दलील दी कि मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए एक समान और पारदर्शी नीति होनी चाहिए।

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क : उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में VVIP दर्शन व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीनियर वकील विष्णु शंकर जैन ने चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष दलील दी कि मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए एक समान और पारदर्शी नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि VVIP या विशेष दर्जे के आधार पर कुछ लोगों को विशेष सुविधा देना और आम श्रद्धालुओं को रोकना साफ तौर पर भेदभाव है।

विष्णु शंकर जैन ने जोर देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी भक्तों को समान अवसर मिलना चाहिए। इस पर सीजेआई ने स्पष्ट कहा कि मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप करना अदालत का काम नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर में VIP दर्शन संस्कृति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को फटकार लगाते हुए कहा,

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“ऐसी याचिकाएं दाखिल नहीं की जानी चाहिए। श्रद्धालु इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं करते। हम इस पर और कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।”

कोर्ट ने साफ किया कि मंदिरों के संचालन और व्यवस्थाओं को विनियमित करना न्यायपालिका का कार्य नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन और संबंधित प्राधिकरणों की होती है।

दरअसल, यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के अंजनेय मंदिर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उठा। उस मामले में विष्णु शंकर जैन अपने मुवक्किल विद्यादास बाबा की ओर से पेश हो रहे थे। उन्होंने अदालत को बताया कि महाकाल मंदिर में VVIP व्यवस्था के चलते आम श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोग बिना प्रतीक्षा के दर्शन कर लेते हैं। जैन ने इसे संविधान में निहित समानता के अधिकार के खिलाफ बताया।

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने दो टूक कहा कि धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्था में अदालत दखल नहीं दे सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की शिकायतें मंदिर ट्रस्ट या राज्य सरकार जैसे सक्षम प्राधिकार के समक्ष रखी जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान विष्णु शंकर जैन ने अपने मुवक्किल विद्यादास बाबा के अर्चक (पुजारी) के अधिकारों का भी हवाला दिया। हालांकि, कोर्ट ने बताया कि यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

गौरतलब है कि उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसे बड़े तीर्थस्थलों में रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। VVIP व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं और आम भक्तों में असंतोष देखा गया है। अब यह देखना होगा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार या मंदिर ट्रस्ट कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।

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