बिहार में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगेगी रोक, नीति बनाने के लिए हाईलेवल कमेटी गठित

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई नीति के मसौदे के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है।

हाईलेवल कमेटी जल्द ही अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम नीति लागू की जाएगी। इसके बाद पूरे बिहार में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी और मरीजों को बेहतर व समय पर इलाज मिल सकेगा। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह निर्णय मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा बढ़ाना है। लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कई डॉक्टर सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी क्लीनिकों में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक नई नीति लागू होने के बाद इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया जाएगा, ताकि वे सरकारी सेवा को प्राथमिकता दें।

नीति निर्माण के लिए गठित हाईलेवल कमेटी की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग की निदेशक प्रमुख डॉ. रेखा झा करेंगी। कमेटी में पीएमसीएच के अधीक्षक, एनएमसीएच के प्राचार्य, बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. के. के. मणी, महासचिव डॉ. रोहित कुमार और आईजीआईएमएस के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति प्रसाद सिंह को शामिल किया गया है।

सरकार ने चिकित्सक संगठनों के प्रतिनिधियों को कमेटी में शामिल कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। माना जा रहा है कि यदि यह नीति प्रभावी रूप से लागू होती है, तो सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, लंबी प्रतीक्षा और अनावश्यक रेफरल जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी।

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