NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिरे एक अंचल अधिकारी (CO) पर बड़ी कार्रवाई की है। लगातार मिल रही शिकायतों और प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए मंत्री ने संबंधित CO को तत्काल प्रभाव से “ऑन सपोर्ट” से हटाने का निर्देश दिया है।
मंत्री ने विभागीय सचिव को साफ आदेश दिया है कि आरोपी अधिकारी को मौजूदा पद से हटाकर उसके खिलाफ विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित CO पर अपने निजी गार्ड के माध्यम से 25 हजार रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन से जुड़े एक मामले के निपटारे के बदले यह रकम मांगी गई और गार्ड के जरिए ली भी गई। आरोप यह भी है कि शिकायत के बावजूद CO ने न तो कोर्ट के आदेश का पालन किया और न ही पीड़ित को राहत देने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया।
शिकायतों में यह भी कहा गया है कि CO भू-माफियाओं को संरक्षण देते रहे हैं और जमीन से जुड़े मामलों में जानबूझकर गड़बड़ियां की गईं। वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद फाइलें लंबित रखी गईं, जबकि भू-माफियाओं के पक्ष में नियमों को ताक पर रखकर फैसले किए गए। इतना ही नहीं, आरोप है कि CO स्वयं मोबाइल फोन के माध्यम से शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर पैसों की मांग और दबाव बनाते थे।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब एक के बाद एक कई शिकायतें विभाग तक पहुंचीं। अलग-अलग लोगों ने लिखित और मौखिक रूप से आरोप लगाया कि अधिकारी की कार्यशैली पूरी तरह संदिग्ध रही है और उनके कार्यकाल में जमीन से जुड़े विवादों में इज़ाफा हुआ। कई मामलों में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचा।
गौरतलब है कि मंत्री विजय कुमार सिन्हा इन दिनों विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं। वे कई मंचों से साफ कह चुके हैं कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार, दलाली और भू-माफियाओं से सांठगांठ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपी CO से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जांच में रिश्वतखोरी, पद के दुरुपयोग और भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आरोप सही पाए जाने पर निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है।
इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है। वहीं आम लोगों और जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय से परेशान पीड़ितों ने मंत्री के इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सख़्त और निष्पक्ष कार्रवाई होती रही तो जमीन से जुड़े विवादों और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
फिलहाल पूरे मामले पर विभाग की पैनी नजर बनी हुई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।