NEWS PR डेस्क: अजित पवार—महाराष्ट्र की राजनीति के वो खिलाड़ी, जिनका नाम आते ही सत्ता के समीकरण बदल जाते थे । 35 साल का सियासी सफर, छह बार डिप्टी सीएम, आठ बार विधायक और राज्य के सबसे ज़्यादा बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और रणनीतिक नेताओं में गिने जाते थे। उनका पूरा नाम अजित अनंतराव पवार था और वे दिग्गज नेता शरद पवार के भतीजे थे।
शरद पवार के बाद पवार परिवार से जिस नेता ने सक्रिय और निर्णायक राजनीति की कमान संभाली, वह नाम अजित पवार का ही था। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है।बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह अजित पवार मुंबई से बारामती के लिए विशेष विमान से रवाना हुए थे। लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी आने के कारण विमान हादसे का शिकार हो गया। हादसे की खबर सामने आते ही पवार परिवार और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। इसके साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा पावर सेंटर शांत हो गया।

अजित पवार के निधन ने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता के समीकरणों को भी झकझोर कर रख दिया है। करीब 35 साल के सियासी सफर में उन्होंने छह बार उपमुख्यमंत्री और आठ बार विधायक के तौर पर राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वे महाराष्ट्र के उन वित्त मंत्रियों में शामिल रहे, जिन्होंने सबसे अधिक बार बजट पेश किया। उनका यूं अचानक चले जाना राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि सवाल यह है कि “अजित पवार के बाद क्या?” क्या अजित पवार के बिना एनसीपी अपने अस्तित्व को बनाए रख पाएगी, या फिर चाचा शरद पवार के नेतृत्व में पवार परिवार एक बार फिर एकजुट होगा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजित पवार की एनसीपी की कमान अब कौन संभालेगा।

डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद दो बड़े राजनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं।
पहला—अजित पवार के बाद एनसीपी की कमान किसके हाथों में जाएगी?
दूसरा—क्या महायुति सरकार में उनकी जगह किसी नए डिप्टी सीएम की नियुक्ति होगी, या यह पद फिलहाल खाली रहेगा?
अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा है, वह है उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थीं। लेकिन बदले हालात में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक राज्यसभा सांसद के तौर पर वे शरद पवार के सामने स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका निभा पाएंगी, या फिर पार्टी के भीतर विलय की चर्चा और तेज़ होगी।
परिवार के अन्य सदस्यों में पार्थ पवार और जय पवार का नाम भी सामने आ रहा है। पार्थ पवार जहां कानूनी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं जय पवार की दावेदारी को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है। यदि नेतृत्व परिवार से बाहर जाता है, तो प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे अनुभवी नेताओं की भूमिका अहम हो सकती है।

सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली अब एनसीपी के विलय को लेकर है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों से लेकर जिला परिषद चुनावों तक जिस तरह दोनों गुट साथ आते दिखे हैं, उससे संकेत मिलते हैं कि जुलाई 2023 में बनी राजनीतिक दीवार अब कमजोर पड़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार, शरद पवार और सुप्रिया सुले पहले ही इस दिशा में संकेत दे चुके हैं। हालांकि महायुति और महाअघाड़ी के समीकरण इस फैसले को जटिल बना रहे हैं। यही वजह है कि पवार परिवार हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना चाहता है।

अजित पवार एक ऐसे नेता थे जिनकी प्रशासनिक पकड़ और बेबाक राजनीतिक शैली उन्हें अलग पहचान देती थी। उनके बिना बारामती और पुणे की राजनीति अधूरी मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुनेत्रा पवार नेतृत्व संभालती हैं, या फिर पवार परिवार एक बार फिर एक मंच पर नज़र आएगा।