NEWS PR डेस्क: बिहार के सड़क नेटवर्क को नई ऊंचाई देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। गया के आमस से दरभंगा तक प्रस्तावित बिहार के पहले नॉर्थ-साउथ एक्सप्रेसवे को लेकर संसद में अहम जानकारी साझा की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बताया कि यह परियोजना तेजी से प्रगति पर है और दिसंबर 2026 तक इसे आम लोगों के लिए खोलने का लक्ष्य तय किया गया है।
संसद में दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे बिहार की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देगा। लगभग 189 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से दक्षिण और उत्तर बिहार पहली बार सीधे और तेज रफ्तार सड़क से जुड़ेंगे।
यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे सात प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। इसके दायरे में आने वाले करीब 19 शहरों को सीधा लाभ मिलेगा। पटना में गंगा नदी पर बन रहे कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल के माध्यम से यह एक्सप्रेसवे नदी को पार करेगा, जिससे दोनों हिस्सों के बीच आवाजाही और अधिक सहज हो जाएगी।
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने इस दौरान दरभंगा-जयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-527B) और दरभंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की धीमी प्रगति का मुद्दा भी उठाया। मंत्री अजय टम्टा ने आश्वस्त किया कि दरभंगा-जयनगर परियोजना को अगले वित्तीय वर्ष तक पूरा कर लिया जाएगा। वहीं एलिवेटेड कॉरिडोर और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय पर जोर दिया।
एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और माल परिवहन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार की दीर्घकालिक योजना के तहत इस एक्सप्रेसवे को आगे चलकर नेपाल सीमा तक विस्तारित करने की तैयारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे भविष्य में बिहार की आर्थिक और सामरिक जरूरतों की रीढ़ बन सकता है और राज्य के समग्र विकास को नई दिशा देगा।