आस्था और रहस्य का संगम है सीताकुंड, सदियों बाद भी उबलता है माता सीता की अग्नि परीक्षा का साक्ष्य

Puja Srivastav

NEWS PR डेस्क : सीताकुंड अपने उबलते गर्म जल के रहस्य के कारण आज भी लोगों को हैरान और आकर्षित करता है। यह माता सीता की अलौकिक शक्ति का प्रभाव है या फिर प्रकृति की कोई अब तक न सुलझी पहेली—इस पर आस्था और तर्क के बीच बहस जारी है। हर वर्ष माघ मेले के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है और यह स्थल भक्तिभाव से सराबोर हो उठता है।

सीताकुंड मंदिर परिसर श्रद्धा और रहस्य का ऐसा केंद्र है, जहां आस्था और जिज्ञासा एक साथ दिखाई देती हैं। यह स्थल रामतीर्थ के नाम से भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहीं माता सीता ने अग्नि परीक्षा देकर अपनी निष्कलंकता सिद्ध की थी। कहा जाता है कि इस दिव्य घटना के बाद धरती से एक गर्म जलधारा प्रकट हुई, जो आगे चलकर सीताकुंड के नाम से जानी गई।

इस स्थल की सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि सीताकुंड से निकलने वाला पानी हर समय गर्म रहता है। इसी अद्भुत विशेषता के कारण यहां प्रतिवर्ष माघ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर पूर्व स्थित सीताकुंड की पहचान उसकी रहस्यमयी जलधारा से है, जो पूरे साल गर्म बनी रहती है। मंदिर परिसर में सीताकुंड के अलावा राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नाम पर चार अन्य कुंड भी मौजूद हैं, लेकिन इन सभी कुंडों का पानी सामान्य और ठंडा है। केवल सीताकुंड का जल ही गर्म है, जो न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी आज तक एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। इस रहस्य को समझने के लिए कई बार शोध और अध्ययन किए गए, मगर अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है।

इतिहासकारों के अनुसार, सीताकुंड की लंबाई और चौड़ाई लगभग 20 फीट है, जबकि इसकी गहराई करीब 12 फीट बताई जाती है। वर्ष 1765 में अंग्रेज यात्री टाइफेन्थलर ने इस जल का परीक्षण किया था और बताया था कि सीताकुंड का पानी करीब आठ महीने तक शुद्ध बना रहता है। हालांकि गर्मियों के मौसम में इसके तापमान में कुछ कमी देखी जाती है।

सीताकुंड में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन माघ महीने में यहां आयोजित होने वाला माघी मेला विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। वर्ष 2026 में यह मेला 1 फरवरी से प्रारंभ हुआ है और इस बार इसे पहली बार राजकीय मेले का दर्जा दिया गया है। मेले के दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर गर्म जल में स्नान करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा लकड़ी के फर्नीचर की दुकानें लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहती हैं, जो करीब एक महीने तक लगी रहती हैं। मुंगेर ही नहीं, बल्कि खगड़िया, बेगूसराय समेत आसपास के कई जिलों से लोग यहां पहुंचकर अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार लकड़ी का सामान खरीदते हैं। सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित यह मेला अब आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और व्यापारिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम बन चुका है।

Share This Article