NEWS PR डेस्क: बिहार के दरभंगा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में मजदूरी के बकाया को लेकर हुए विवाद में पुलिस ने 70 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है। सभी नामजद आरोपी ब्राह्मण समाज से बताए जा रहे हैं। अब तक इस मामले में 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिस आगे की जांच में जुटी है।
क्या है पूरा मामला ?
एफआईआर के अनुसार, हरिनगर गांव निवासी अशर्फी पासवान ने कुशेश्वरस्थान थाने में आवेदन देकर आरोप लगाया कि मजदूरी की बकाया राशि मांगने पर उनके परिवार के साथ जातिसूचक गालियां दी गईं और मारपीट की गई। अशर्फी पासवान का कहना है कि हेमंत झा के पास उनके बेटे विक्रम की करीब ढाई लाख रुपये की मजदूरी बकाया है, जो पिछले पांच वर्षों से नहीं दी गई।

बताया गया कि 30 जनवरी 2026 को इस विवाद को पंचायत में सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन वहां हंगामा हो गया। इसके अगले दिन, 31 जनवरी की सुबह करीब 7 बजे, जब विक्रम सब्जी लेकर घर लौट रहा था, तभी हेमंत झा, ओमप्रकाश झा समेत अन्य लोगों ने लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया।
एफआईआर में हेमंत झा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने घर में घुसकर मारपीट की और दो लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और एलसीडी टीवी सहित अन्य सामान लूट लिया ।
बिरौल डीएसपी प्रभाकर तिवारी ने बताया कि इस घटना में 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज डीएमसीएच में चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक पुराना विवाद था, जिसमें मारपीट की घटना हुई है। अब तक 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
हालांकि घटना 30 और 31 जनवरी की है, लेकिन प्राथमिकी सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया। 3 फरवरी 2026 को (NCIB) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एफआईआर की कॉपी साझा करते हुए लिखा कि इस मामले में गांव के लगभग सभी ब्राह्मणों को आरोपी बना दिया गया है और सभी पर SC/ST एक्ट सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

एनसीआईबी ने दावा किया कि एफआईआर में नामजद कई लोग दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में मजदूरी या नौकरी करते हैं और घटना के समय गांव में मौजूद भी नहीं थे।

आपको बता दें, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मजदूरी मांगने पर दबंगों ने दलित परिवार पर हमला किया, जिसमें 11 लोग घायल हुए। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि मूल विवाद सिर्फ पैसों के लेन-देन का था, जिसे बाद में जातीय रंग दे दिया गया। उनका आरोप है कि कई निर्दोष लोगों को भी एफआईआर में फंसा दिया गया है।
घटना के बाद हरिनगर गांव में तनाव बना हुआ है। गिरफ्तारी के डर से कई पुरुष गांव छोड़कर चले गए हैं। वहीं, घायल परिवार के लोग घटना को याद कर अब भी दहशत में हैं।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की हर पहलू से जांच कर रहे हैं, ताकि दोषियों की पहचान हो सके और गांव में शांति बहाल की जा सके। प्रशासन की चुनौती यही है कि निष्पक्ष जांच के ज़रिये दोषियों को सज़ा दिलाई जाए और निर्दोषों को राहत देते हुए हरिनगर गांव में बिगड़े सामाजिक सौहार्द को दोबारा बहाल किया जाए।