NEWS PR डेस्क: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 31 साल पुराने एक मामले में पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद उनका नाम चर्चा में आ गया है। राजनीति में आक्रामक तेवर और सख्त छवि के लिए पहचाने जाने वाले पप्पू यादव की निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग रही है। कम ही लोग जानते हैं कि असल जिंदगी में वह बेहद रोमांटिक स्वभाव के इंसान रहे हैं।

इस बात का खुलासा खुद पप्पू यादव ने अपनी आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ में किया है। किताब में उन्होंने अपनी प्रेम कहानी के ऐसे पहलुओं को साझा किया है, जो उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व से बिल्कुल अलग और काफी दिलचस्प हैं।
जेल से शुरू हुआ प्यार:
पप्पू यादव लिखते हैं कि उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष 1991 में हुई, जब वे पटना के बांकीपुर जेल में बंद थे। जेल सुपरिटेंडेंट के आवास से सटे मैदान में खेलते बच्चों को देखना उन्हें अच्छा लगता था। इन्हीं में एक लड़का था विक्की, जो आगे चलकर उनकी जिंदगी की सबसे अहम कड़ी बना।

एक दिन विक्की ने पप्पू यादव को अपनी फैमिली एलबम दिखाई। उसी एलबम में विक्की की बहन *रंजीत रंजन* की टेनिस खेलती तस्वीर थी। पप्पू यादव लिखते हैं कि उस तस्वीर को देखते ही वे रंजीत को दिल दे बैठे।
पटना क्लब में पहली मुलाकात:
रंजीत रंजन, सेना से रिटायर अधिकारी की बेटी थीं और नेशनल व इंटरनेशनल स्तर की टेनिस खिलाड़ी थीं। पप्पू यादव ने पहली बार उन्हें पटना क्लब में टेनिस खेलते देखा। उस वक्त रंजीत की उम्र महज 17 साल थी और वहीं पप्पू यादव अपना दिल हार बैठे।

जेल में भी मिली थीं खास सुविधाएं:
किताब ‘Behind Bars: Prison Tales of India’s Most Famous’ के अनुसार, जेल में रहते हुए भी पप्पू यादव को विशेष सुविधाएं मिली थीं। वे आसपास के मैदान में जा सकते थे और जेल सुपरिटेंडेंट के फोन का इस्तेमाल भी करते थे।
रंजीत की तस्वीर देखने के बाद पप्पू यादव उसी फोन से उनके घर कॉल करने लगे—शुरुआत में सिर्फ आवाज सुनने के लिए ब्लैंक कॉल, फिर धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई।
‘कितना मोटा लड़का है’:
एक बार अखबार में पप्पू यादव की तस्वीर छपी, जिसे देखकर रंजीत ने अपनी मां से कहा था—
“देखो, कितना मोटा लड़का है।”

उस वक्त रंजीत की भावनाएं पप्पू यादव के लिए नहीं थीं, लेकिन पप्पू यादव पूरी तरह उनके दीवाने हो चुके थे। वे रोज पटना क्लब जाकर रंजीत की टेनिस प्रैक्टिस देखते, कई बार बिना सुरक्षा के मोटरसाइकिल से मैच देखने पहुंच जाते।
इनकार से टूटे पप्पू यादव:
आत्मकथा में पप्पू यादव लिखते हैं कि बार-बार प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उन्होंने आवेश में नींद की गोलियां खा लीं। हालत बिगड़ने पर उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद रंजीत का दिल पिघला और दोनों के रिश्ते ने नया मोड़ लिया।
धर्म और परिवार बने सबसे बड़ी चुनौती:
शादी की राह आसान नहीं थी। दोनों अलग-अलग धर्म से थे। रंजीत के पिता गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी थे और उन्होंने शर्त रखी कि शादी तभी होगी जब पप्पू यादव सिख धर्म अपनाएंगे। पप्पू यादव इसके लिए भी तैयार हो गए।
इसके अलावा रंजीत की मां ने शर्त रखी कि बेटी दिल्ली में रहेगी—पप्पू यादव इस पर भी सहमत हो गए।

अहलूवालिया की भूमिका:
इसके बावजूद बात नहीं बनी तो पप्पू यादव ने राज्यसभा सांसद *एस. एस. अहलूवालिया* की मदद ली। उनके हस्तक्षेप के बाद आखिरकार रंजीत के माता-पिता शादी के लिए मान गए।
शादी में भटका चार्टर्ड प्लेन:
शादी के दिन रंजीत का परिवार समय पर नहीं पहुंच पाया, जिससे सभी परेशान हो गए। बाद में पता चला कि चार्टर्ड प्लेन का पायलट रास्ता भटक गया था।
आखिरकार 6 फरवरी 1994 को पप्पू यादव और रंजीत रंजन की शादी पूर्णिया में संपन्न हुई। पूरी नगरी सजाई गई थी। VIP मेहमानों से लेकर आम लोगों तक के लिए खास इंतजाम थे। उस वक्त के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी इस शादी में शामिल हुए थे।

जेल से शुरू होकर शादी तक पहुंची पप्पू यादव की वो प्रेम कहानी…जो बताती है कि सख्त दिखने वाले नेताओं की जिंदगी में भी दिल, जज़्बात और प्यार पूरी शिद्दत से मौजूद होता है।
