NEWS PR डेस्क: पूर्णिया का चर्चित सूरज बिहारी हत्याकांड अब पुलिस के शिकंजे में पूरी तरह आ चुका है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने सभी 7 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 27 जनवरी को वसंत विहार इलाके में युवा बिजनेसमैन और ब्लॉगर सूरज बिहारी की हत्या ने पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया था। सोशल मीडिया पोस्ट और इंस्टाग्राम रील्स को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि वह खूनी वारदात में बदल गया। मरंगा थाना पुलिस ने सबूत जुटाने के साथ-साथ आरोपियों पर लगातार दबाव बनाया, जिसके चलते महज दो हफ्तों के भीतर सभी आरोपी कानून की गिरफ्त में आ गए।

सरेंडर और गिरफ्तारी की पूरी कहानी:
घटना के बाद पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश में नेपाल बॉर्डर से लेकर मुजफ्फरपुर तक छापेमारी तेज कर दी। मुख्य आरोपी स्नेहिल झा उर्फ स्नेहिल ठाकुर और उसका भाई आदित्य ठाकुर, जो घटना के बाद से फरार थे, उन्होंने मुजफ्फरपुर में सरेंडर कर दिया। पुलिस के अनुसार, लगातार दबिश, रिश्तेदारों की निगरानी और कुर्की की तैयारी ने दोनों पर ऐसा दबाव बनाया कि उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए भवानीपुर थाना क्षेत्र से ब्रजेश सिंह, नंदू सिंह और अमन सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को सूचना मिली थी कि ये आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे। छठे आरोपी रजनीश सिंह को नवगछिया के बिहापुर से पकड़ा गया, जबकि सातवें आरोपी अंशु सिंह ने भी गिरफ्तारी से बचने का रास्ता बंद होते देख पूर्णिया कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इस तरह पुलिस ने एक-एक कर सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
CCTV फुटेज से खुला राज:
जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पूरी वारदात की सच्चाई उजागर कर दी। पुलिस जांच में पता चला कि सूरज बिहारी की हत्या उनकी ही लाइसेंसी पिस्टल से की गई, जिसे अपराधियों ने छीन लिया था।

फुटेज में एक काली स्कॉर्पियो भी दिखाई दी, जिसने गोली लगने के बाद भाग रहे सूरज बिहारी को टक्कर मारी थी। पुलिस अब स्कॉर्पियो के मालिक और ड्राइवर की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।
अब मददगारों पर भी होगी कार्रवाई:
पूर्णिया एसपी स्वीटी सेहरावत ने बताया कि सभी नामजद आरोपी जेल में हैं और अब उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने आरोपियों को छिपने या भागने में मदद की। ऐसे लोगों के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाएगी। साथ ही पुलिस इस मामले में स्पीडी ट्रायल की मांग करेगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।
क्या था मामला:
27 जनवरी को सूरज बिहारी की हत्या मरंगा थाना क्षेत्र के नेवालाल चौक में हुई थी। विवाद को सुलझाने के लिए सूरज मौके पर पहुंचे थे, तभी उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं।
इस मामले का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था । पुलिस ने तब सात लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी और न्यायालय के आदेश पर सभी अभियुक्तों के घर कुर्की के इश्तहार चिपकाए गए थे,जिसके बाद अब बड़ी करवाई करते हुए पुलिस ने सभी 7 नामजद आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
विवाद की वजह:
सुरज बिहारी की हत्या एक स्थानीय विवाद से जुड़ी थी। पूर्णिया के ब्लॉगर सूरज शर्मा और एक लड़की की फोटो को लेकर शुरू हुए विवाद में लड़की के बॉयफ्रेंड स्नेहिल झा ने सूरज शर्मा के साथ मारपीट की थी। 27 जनवरी को इस विवाद को सुलझाने के लिए सूरज बिहारी वहां पहुंचे थे, इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई।
बता दें 28 वर्षीय सूरज बिहारी बचपन से ही बिजनेस में रुचि रखते थे और 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के कारोबार की कमान संभाल ली थी। उनके पास मक्के के करीब 18 गोदाम थे, साथ ही बिल्डिंग मैटेरियल और रियल एस्टेट में भी बड़ा निवेश था। बताया जाता है कि उनका सालाना टर्नओवर लगभग 15 करोड़ रुपये था।
लग्जरी लाइफ-स्टाइल के लिए थे मशहूर:
सूरज बिहारी अपनी हाई-प्रोफाइल लाइफ-स्टाइल को लेकर भी चर्चा में रहते थे। वे करीब ढाई करोड़ रुपये की डिफेंडर कार से चलते थे और उनके पास 22 लाख रुपये की लाइसेंसी पिस्टल थी। सुरक्षा के लिए 2-3 निजी गार्ड तैनात रहते थे, जिन पर हर महीने लगभग एक लाख रुपये खर्च होते थे।कारों और बाइक्स के शौकीन सूरज के पास डिफेंडर, पजेरो, स्कॉर्पियो, जिप्सी, बुलेट समेत करीब 8 वाहन थे।
सोशल मीडिया से मिली पहचान:
शोहरत पाने के लिए सूरज ने ब्लॉगिंग शुरू की थी। वे सोशल मीडिया पर नियमित रूप से वीडियो और रील्स पोस्ट करते थे, जिनमें उनकी लग्जरी लाइफ-स्टाइल साफ नजर आती थी। महज एक साल में इंस्टाग्राम पर उनके 30 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए थे, जबकि फेसबुक पर भी 11 हजार से अधिक लोग उनसे जुड़े थे।
सदमे में पिता की हार्ट अटैक से मौत:
परिवार के लिए यह झटका तब और बड़ा हो गया जब सूरज बिहारी की तेरहवीं भी नहीं हुई थी और सूरज बिहारी के पिता जवाहर यादव की मौत हो गयी। कुछ ही दिन पहले जवाहर यादव अपने बेटे की अस्थियां विसर्जित करके लौटे थे। सूरज की मौत का सदमा बर्दाश्त न कर पाने के कारण पिता की भी मौत हो गई।
जवाहर यादव पूर्णिया के बड़े कारोबारी थे। उनका गुलाब बाग क्षेत्र में दर्जनों गोदाम हैं और अरबों रुपये का कारोबार होता है। उनके बेटे सूरज बिहारी ने भी पिता के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पिता-पुत्र की मौत से परिवार बुरी तरह से टूट चुकी है।