बिहार में बढ़ते एनकाउंटर पर सियासत तेज, ‘थ्री सी’ मॉडल के बीच कानून-व्यवस्था पर बहस

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार की राजनीति में कभी ‘थ्री सी’ क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म के खिलाफ सख्ती को लेकर पहचान बनाने वाली सरकार अब बढ़ते एनकाउंटर को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व वाली सरकार में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी वर्तमान में भाजपा कोटे से गृह मंत्री बने सम्राट चौधरी के पास है।

2025 में एनकाउंटर की संख्या में उछाल

पुलिस आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2024 में जहां एनकाउंटर की संख्या सीमित रही, वहीं 2025 में विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की सक्रियता बढ़ी। 2024 में जहां कुल 8 मुठभेड़ दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 29 तक पहुंच गई। इनमें कुछ मामलों में अपराधियों के घायल होने की खबरें आईं, तो कुछ मामलों में मौत भी हुई। रोहिणी में संयुक्त रूप से बिहार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में चार कथित गैंगस्टरों के मारे जाने का मामला भी चर्चा में रहा।

2026 के शुरुआती महीनों में भी रफ्तार कायम

वर्ष 2026 अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती महीनों में ही पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 15 मुठभेड़ों की खबर सामने आई है। इनमें दो मामलों में अपराधियों की मौत हुई, जबकि कई को पैर में गोली लगने से घायल किया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।

अपराध के आंकड़े बने चुनौती

राज्य में वर्ष 2025 के दौरान हत्या, दुष्कर्म और डकैती की घटनाओं में वृद्धि ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 2556 हत्याएं, 2025 दुष्कर्म और 174 डकैती की घटनाएं दर्ज की गईं। ऐसे में ‘सुशासन’ की छवि बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती माना जा रहा है।

विपक्ष के निशाने पर सरकार

इधर, विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने एनकाउंटर की नीति पर सवाल उठाए हैं। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर एक खास जाति और समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि कानून के नाम पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सरकार की दलील: अपराध पर सख्ती जरूरी

सरकारी पक्ष का तर्क है कि बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। गृह विभाग का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का सवाल नहीं उठता।

बिहार में ‘थ्री सी’ मॉडल की पहचान के बीच अब कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि एनकाउंटर की बढ़ती संख्या अपराध नियंत्रण में कितनी प्रभावी साबित होती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप किस दिशा में जाते हैं।

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