हौसले को सलाम: पिता के निधन के बाद भी बेटी ने आंसुओं के साथ दी मैट्रिक परीक्षा

Neha Nanhe
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NEWS PR डेस्क : बिहार के भागलपुर से एक बेहद भावुक लेकिन प्रेरक घटना सामने आई है। यहां 10वीं कक्षा की एक छात्रा इन दिनों मैट्रिक परीक्षा दे रही है। परीक्षा से ठीक एक रात पहले उसके पिता का निधन हो गया, जिससे पूरा परिवार गहरे सदमे में डूब गया।पिता के पार्थिव शरीर को देखते ही उसका मनोबल बिखर गया और वह भावनात्मक रूप से टूट गई। ऐसी कठिन घड़ी में किसी के लिए भी खुद को संभाल पाना आसान नहीं होता। फिर भी, इस छात्रा ने हिम्मत नहीं हारी। गहरे दुख के बीच उसने संयम रखा और परिस्थिति का सामना करने का साहस दिखाया।

कहते हैं, जिंदगी कई बार ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहां दिल और जिम्मेदारी के बीच फैसला करना पड़ता है। ऐसी ही एक मार्मिक और प्रेरक घटना बिहार के भागलपुर जिले से सामने आई है। घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह गांव की एक छात्रा ने अपने जीवन के सबसे कठिन क्षण में ऐसा निर्णय लिया, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया।

जानीडीह निवासी राजकिशोर महतो पिछले करीब 22 महीनों से ओरल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी इतनी बढ़ चुकी थी कि इलाज के दौरान उनकी जीभ तक काटनी पड़ी थी। वे बोलने में असमर्थ हो गए थे और नाक में लगी पाइप से तरल आहार ले रहे थे। परिवार लगातार उनकी सेवा में लगा था, लेकिन शुक्रवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली। घर में मातम छा गया।

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इसी बीच उनकी बेटी प्रिया कुमारी, जो मैट्रिक की छात्रा है, के सामने बड़ी चुनौती थी। अगली सुबह उसकी पहली पाली की परीक्षा थी और घर में पिता का पार्थिव शरीर रखा था। पिता को खोने के दुख में वह पूरी तरह टूट चुकी थी और परीक्षा देने की स्थिति में नहीं थी।

परिवार और गांव वालों ने उसे समझाया कि उसके पिता का सपना था कि वह पढ़-लिखकर आगे बढ़े। अपनों के हौसले ने उसे संभाला। नम आंखों और भारी मन से उसने खुद को तैयार किया और परीक्षा केंद्र पहुंची। वहां उसने पूरी एकाग्रता के साथ प्रश्नपत्र हल किया।

परीक्षा समाप्त होते ही वह सीधे घर लौटी और पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हुई। बेटी होने का फर्ज निभाते हुए उसने श्मशान घाट तक साथ दिया और दाह संस्कार की प्रक्रिया में भी मौजूद रही।

यह घटना केवल एक छात्रा की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि अडिग संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल है। प्रिया कुमारी ने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे इंसान को अपने लक्ष्य से भटकने नहीं देते। आज पूरे इलाके में उसकी हिम्मत और धैर्य की सराहना की जा रही है।

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