औरंगाबाद जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के कारण लोग दिन के समय घरों से निकलने से बच रहे हैं। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, जबकि लू और डिहाइड्रेशन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आई
गर्मी के इस प्रकोप का सबसे ज्यादा असर जिले के सदर अस्पताल में देखने को मिल रहा है, जहां मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि अस्पताल में लू से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्था किए जाने के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आई।अस्पताल प्रबंधन की ओर से नशा मुक्ति वार्ड को अस्थायी रूप से लू वार्ड में तब्दील करने की बात कही गई थी। साथ ही दावा किया गया था कि हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए 14 बेड सुरक्षित रखे गए हैं, लेकिन जब स्थिति का जायजा लिया गया तो सभी बेड पहले से ही सिजेरियन ऑपरेशन के मरीजों से भरे मिले।
लू से पीड़ित मरीजों को अन्य सामान्य वार्डों में भर्ती किया जा रहा
स्थिति इतनी खराब थी कि कई मरीजों को बेड न मिलने के कारण जमीन पर लेटकर इलाज कराना पड़ा। वहीं, लू से पीड़ित मरीजों को अन्य सामान्य वार्डों में भर्ती किया जा रहा है, जहां पहले से ही भारी भीड़ मौजूद है। इससे मरीजों को न तो उचित सुविधा मिल पा रही है और न ही समय पर राहत।भीषण गर्मी और अव्यवस्थित स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
औरंगाबाद से रूपेश कुमार की रिपोर्ट
औरंगाबाद में भीषण गर्मी से हाल बेहाल: सदर अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
42-degree heat and a dilapidated hospital: Aurangabad's heatwave disrupts life