NEWS PR डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए 17 महत्वपूर्ण समझौतों और कई प्रमुख घोषणाओं पर सहमति बनी। इस यात्रा के साथ भारत-इजराइल संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाने की घोषणा भी की गई।
खनन, समुद्री विरासत और संस्कृति में सहयोग
दोनों देशों ने भू-सर्वेक्षण और खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत डेटा साझा करने, निवेश और संसाधनों के वैज्ञानिक विकास पर जोर रहेगा।
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास में सहयोग पर भी सहमति बनी। गुजरात के लोथल में विकसित हो रहे इस परिसर को प्रदर्शनियों, शोध और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के माध्यम से सशक्त किया जाएगा।
वर्ष 2026-2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत संगीत, नृत्य, नाटक और कला के क्षेत्र में संयुक्त आयोजन किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और समझ मजबूत होगी।
यूपीआई और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाते हुए NPCI International Payments Limited (NIPL) और इजराइल की MASAV के बीच यूपीआई के कार्यान्वयन पर समझौता हुआ। इससे भारत और इजराइल के बीच क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा International Financial Services Centres Authority (IFSCA) और Israel Securities Authority (ISA) के बीच वित्तीय सेवाओं और फिनटेक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
कृषि, मत्स्य और नवाचार में साझेदारी
कृषि क्षेत्र में Indian Council of Agricultural Research (ICAR) और इजराइल की एजेंसी MASHAV के बीच भारत-इजराइल नवाचार केंद्र (IINCA) स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह केंद्र उन्नत कृषि तकनीक, उपग्रह आधारित सिंचाई, जर्मप्लाज्म एक्सचेंज और क्षमता निर्माण पर कार्य करेगा।
मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिसमें आधुनिक सिस्टम, रोग प्रबंधन, मैरीकल्चर और सीवीड उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एआई, साइबर और भविष्य की तकनीकों पर फोकस
दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास, एथिकल एआई और शिक्षा में एआई के उपयोग पर दो अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा भारत में भारत-इजराइल साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए आशय पत्र जारी किया गया।
‘होराइजन स्कैनिंग’ के क्षेत्र में सहयोग की घोषणा के तहत भविष्य की तकनीकों की पहचान, संयुक्त अनुसंधान और एआई टूल्स के उपयोग पर काम किया जाएगा।
श्रम गतिशीलता: 50,000 भारतीयों को अवसर
वाणिज्य, सेवा, विनिर्माण और रेस्तरां क्षेत्र में लेबर मोबिलिटी को लेकर तीन अलग-अलग प्रोटोकॉल पर सहमति बनी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 50,000 तक भारतीय श्रमिकों को इजराइल में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। रिटेल, लॉजिस्टिक्स, होटल इंडस्ट्री, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भर्ती की जाएगी।
शिक्षा और कानूनी सहयोग
Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर समझौता हुआ, जिसके तहत छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, गणित व अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संयुक्त शोध किया जाएगा।
साथ ही, इजराइली इंस्टीट्यूट ऑफ कमर्शियल आर्बिट्रेशन और इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन के बीच मध्यस्थता और पंचाट के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
प्रमुख घोषणाएँ
यात्रा के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संयुक्त समिति को मंत्री स्तर तक उन्नत करने, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के नेतृत्व में उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग, वित्तीय संवाद की शुरुआत, टेक-गेटवे पहल, कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप और भारत-इजराइल संसदीय मैत्री समूह के गठन जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी की गईं।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-इजराइल संबंधों को रक्षा और कृषि सहयोग से आगे बढ़ाकर डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और मानव संसाधन विकास के व्यापक दायरे में ले जाने वाली मानी जा रही है।