वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती ताकत, 2025-26 में हुए कई नए मुक्त व्यापार समझौते

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: भारत ने वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में अपनी मजबूत और आत्मविश्वासी पहचान बनाई है। वर्ष 2025-26 के दौरान देश ने कई नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच का उल्लेखनीय विस्तार किया है।

सरकार के अनुसार भारत अब तक कुल 38 देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौतों तक अपनी पहुंच बना चुका है। इस दिशा में पहला बड़ा कदम वर्ष 2021 में Mauritius के साथ हुए समझौते से शुरू हुआ। इसके बाद मई 2022 में United Arab Emirates के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू हुआ और दिसंबर 2022 में Australia के साथ आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता प्रभावी हुआ।

इसके बाद भारत ने 10 मार्च 2024 को European Free Trade Association के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) पर हस्ताक्षर किए, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ। वर्ष 2025 में भारत ने United Kingdom के साथ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए, जबकि दिसंबर 2025 में Oman के साथ CEPA समझौता संपन्न हुआ।

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इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 22 दिसंबर 2025 को New Zealand के साथ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा की गई और 27 जनवरी 2026 को European Union के साथ एफटीए पर सहमति बनी। इसके अलावा 7 फरवरी 2026 को United States के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर भी सहमति बनी है।

सरकार का कहना है कि इन समझौतों से भारतीय किसानों, उद्यमियों और एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। परिधान, चमड़ा, हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों के निर्यात के लिए विकसित देशों के बाजारों में नई संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही छात्रों, आईटी पेशेवरों, शेफ और योग प्रशिक्षकों के लिए विदेशों में काम और पढ़ाई के अवसर भी बढ़ेंगे।

इन समझौतों में पेशेवरों की गतिशीलता, कार्य वीज़ा, सामाजिक सुरक्षा छूट और डिजिटल सेवाओं के विस्तार जैसे कई प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा जैविक उत्पादों और आयुष आधारित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को भी वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलने की संभावना है।

सरकार के अनुसार सभी समझौते आत्मनिर्भर भारत की नीति को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, जिनमें कृषि, डेयरी और घरेलू उद्योग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की भी रक्षा की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते भारत को वैश्विक व्यापार में नई ऊंचाई देने के साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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