NEWS PR डेस्क: दुर्गा पूजा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। संस्कृति मंत्रालय की वैश्विक सहभागिता योजना के तहत दुर्गा पूजा को विश्व मंच पर बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अनुदान सहायता प्रदान की जा रही है। इसकी जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में मंत्रालय द्वारा दुर्गा पूजा के प्रलेखन और अनुसंधान के लिए 22,29,244 रुपये की राशि आवंटित की गई थी। इसका उद्देश्य यूनेस्को को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में दुर्गा पूजा के नामांकन से संबंधित दस्तावेज तैयार करना था। इसके तहत त्योहार से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहलुओं का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया।
सरकार अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘इंक्रेडिबल इंडिया 2.0’ अभियान का भी विस्तार कर रही है, जिसमें यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में दुर्गा पूजा को विशेष रूप से प्रचारित किया जा रहा है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए डिजिटल मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं।
इस दिशा में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से भी दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक झलक दुनिया के सामने पेश की जा रही है। सितंबर 2025 में संगीत नाटक अकादमी ने टोक्यो में भारतीय बंगाली समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘इप्पन शादान होउजिन इंडोजिनो त्सुदोई’ द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा समारोह का वीडियो साझा किया। इसके अलावा दिसंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले में आयोजित अंतर-सरकारी समिति की बैठक के दौरान 190 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और यूनेस्को अधिकारियों के समक्ष पारंपरिक धुनुची नृत्य का प्रदर्शन भी किया गया।
संस्कृति मंत्रालय के अधीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के लिए नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने इस दिशा में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति ने विभिन्न समुदायों, समूहों और व्यक्तियों के साथ संवाद कर त्योहार से जुड़े अनुष्ठानों और परंपराओं का विस्तृत अध्ययन किया है। इन प्रयासों का उद्देश्य दुर्गा पूजा के ऐतिहासिक विकास, कलात्मक उत्कृष्टता और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित और प्रचारित करना है।