गोद लेने की प्रक्रिया को लेकर सरकार के सख्त निर्देश, बच्चों की पहचान और रिकॉर्ड सुरक्षा पर जोर

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 16 मार्च 2026। देश में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए Central Adoption Resource Authority (सीएआरए) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं को मजबूत करना, बच्चों से जुड़े रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखना है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इस वैधानिक निकाय ने राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (सारा) को तीन महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन जारी किए हैं। ये निर्देश Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 और Adoption Regulations 2022 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किए गए हैं।

पहले ज्ञापन में सीएआरए ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने से पहले सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और निर्धारित समय-सीमाओं का पालन अनिवार्य होगा। प्राधिकरण ने कहा है कि उचित जांच, जैविक माता-पिता की तलाश और पुनर्वास के प्रयास किए बिना किसी भी अनाथ या परित्यक्त बच्चे को गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित नहीं किया जा सकता।

दूसरे ज्ञापन में बच्चों और दत्तक व्यक्तियों के रिकॉर्ड के संरक्षण, रखरखाव और हस्तांतरण से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सीएआरए ने कहा कि कई मामलों में विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों या बाल देखभाल संस्थानों के बंद होने या विलय के कारण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहते, जिससे वयस्क दत्तक व्यक्तियों को अपने मूल की जानकारी खोजने में कठिनाई होती है। ऐसे में सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जरूरत पड़ने पर उन्हें निर्धारित प्राधिकरण को सौंपा जाए।

तीसरे ज्ञापन में बच्चों की पहचान की गोपनीयता को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत बाल देखभाल संस्थानों या विशेष दत्तक एजेंसियों में रहने वाले बच्चों की तस्वीर, वीडियो या पहचान से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम पर साझा करने पर रोक लगाई गई है।

सीएआरए ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और उल्लंघन के मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाए। प्राधिकरण का कहना है कि इन कदमों से देश में गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और बाल संरक्षण के अनुरूप बनाया जा सकेगा, साथ ही बच्चों और दत्तक व्यक्तियों की गरिमा और गोपनीयता भी सुरक्षित रहेगी।

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