कचरे से कमाई का मॉडल: सारण का रामपुर बना ‘शक्तिमान’ पंचायत, स्वच्छता और जैविक खेती में नई पहचान

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना/सारण: बिहार के सारण जिले का रामपुर ग्राम पंचायत आज ग्रामीण विकास और स्वच्छता के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरा है। कभी कचरे और गंदगी से जूझने वाला यह पंचायत अब ‘कचरे से संपदा’ की अवधारणा को साकार करते हुए स्वच्छता, जैविक खेती और स्थानीय रोजगार का सफल मॉडल बन गया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान है , ‘शक्तिमान’ बायो कंपोस्ट।

गरखा प्रखंड स्थित इस पंचायत की आबादी करीब 12 हजार है, जहां कुछ वर्ष पहले तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब थी। घरों से निकलने वाला कचरा खुले में फेंक दिया जाता था, जिससे गलियां गंदगी से भरी रहती थीं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आम थीं।

परिवर्तन की शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत हुई, जब पंचायत में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया गया। घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई, हर परिवार को डस्टबिन उपलब्ध कराए गए और स्वच्छताकर्मियों की नियमित तैनाती की गई। लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया गया।

इस पहल को आगे बढ़ाते हुए पंचायत में अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (WPU) की स्थापना की गई, जहां कचरे की छंटाई कर गीले कचरे से ‘नाडेप विधि’ के जरिए जैविक खाद तैयार की जाने लगी। धीरे-धीरे यह प्रयास एक सफल मॉडल में बदल गया।

आज यही जैविक खाद ‘शक्तिमान’ ब्रांड के नाम से जानी जाती है। गुणवत्ता परीक्षण में सफल होने के बाद इसे स्थानीय किसानों को मात्र 7 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक लगभग 1500 किलोग्राम खाद का उत्पादन किया जा चुका है, जिससे पंचायत को अतिरिक्त आय भी हो रही है।

इस पहल का सकारात्मक असर खेती पर भी दिखने लगा है। किसान अब रासायनिक खाद पर निर्भरता कम कर ‘शक्तिमान’ जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, साथ ही खेती की लागत में भी कमी आई है।

रामपुर पंचायत में इस बदलाव के पीछे जनजागरूकता अभियान की बड़ी भूमिका रही है। महिलाओं और बच्चों को केंद्र में रखकर लगातार स्वच्छता, कचरा पृथक्करण और जैविक खेती के फायदे बताए गए। परिणामस्वरूप अब अधिकांश घरों में कचरा अलग-अलग कर संग्रहण के लिए दिया जा रहा है।

आज पंचायत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। गलियां साफ-सुथरी हैं, कचरे के ढेर खत्म हो गए हैं और गांव में स्वच्छता को लेकर नई चेतना विकसित हुई है। इसके साथ ही इस पहल ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।

रामपुर पंचायत की यह सफलता दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता और प्रभावी योजना के जरिए सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है। यह मॉडल अब पूरे बिहार के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

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