NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति में इन दिनों नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से आई खबरों ने सत्ता समीकरण को लेकर कई नए कयासों को जन्म दे दिया है, हालांकि अब तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बदल सकता है सत्ता का चेहरा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि नीतीश कुमार राज्यसभा की ओर रुख करते हैं, तो राज्य की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चर्चाओं के अनुसार, इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के पास जा सकता है, जबकि जनता दल यूनाइटेड को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित फॉर्मूले में दोनों दलों की बराबर भागीदारी होगी। यानी मंत्रिमंडल में दोनों पक्षों से 16-16 मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही, विधानसभा अध्यक्ष और गृह विभाग जैसे अहम पद भी बीजेपी के हिस्से में जाने की चर्चा है।
खबरों के अनुसार, एनडीए के अन्य सहयोगियों की हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। चिराग पासवान की पार्टी को दो मंत्री पद, जीतन राम मांझी की पार्टी को एक और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक मंत्री पद मिलने की बात कही जा रही है।
सीएम चेहरे पर सस्पेंस बरकरार
मुख्यमंत्री पद को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। सम्राट चौधरी समेत कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन किसी पर भी अंतिम मुहर नहीं लगी है। राजनीतिक गलियारों में लगातार नए-नए नाम उछल रहे हैं, जिससे स्थिति और दिलचस्प हो गई है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, इन तमाम अटकलों के बीच सच्चाई यह है कि अभी तक न तो बीजेपी, न जेडीयू और न ही एनडीए के किसी अन्य घटक दल ने इस फॉर्मूले की पुष्टि की है। ऐसे में इसे पूरी तरह से संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।
कब साफ होगी तस्वीर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘खरमास’ के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है और तब नई सरकार के स्वरूप पर अंतिम निर्णय सामने आ सकता है। फिलहाल बिहार की राजनीति में सस्पेंस, रणनीति और कयास तीनों का दौर जारी है।