NEWS PR डेस्क: पटना, 22 मार्च। देशभर के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अब मरीजों का इलाज पूरी तरह डिजिटल ट्रैक पर होगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एमसीआई) के नए निर्देशों के तहत सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रत्येक मरीज का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले को स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए नियमों के अनुसार, बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), आंतरिक रोगी विभाग (आईपीडी) और आपातकालीन सेवाओं में आने वाले हर मरीज के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) नंबर बनाना जरूरी होगा। यही यूनिक नंबर मरीज के इलाज, जांच और दवाओं से जुड़ी सभी जानकारी को एकीकृत रूप से सुरक्षित रखेगा।
बिहार सरकार ने इस व्यवस्था को तेजी से लागू करने के लिए राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। डीन, अधीक्षक और प्राचार्यों को सुनिश्चित करने को कहा गया है कि हर मरीज का पंजीकरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से किया जाए।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों को अब अपने पुराने मेडिकल कागजात साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी अस्पताल में उनका पूरा इलाज इतिहास तुरंत उपलब्ध हो सकेगा, जिससे डॉक्टरों को सटीक और त्वरित उपचार देने में मदद मिलेगी। आपातकालीन स्थितियों में यह प्रणाली और भी उपयोगी साबित होगी।
आभा नंबर बनाने की प्रक्रिया को भी आसान कर दिया गया है। अब मरीज मोबाइल नंबर या आधार के माध्यम से कुछ ही मिनटों में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे अस्पतालों में लंबी कतारों और कागजी औपचारिकताओं से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड से मेडिकल कॉलेजों के मूल्यांकन और मान्यता प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी। हर मरीज और इलाज का डेटा दर्ज होने से संस्थानों के कामकाज का वास्तविक आकलन संभव होगा।