NEWS PR डेस्क: पटना/मुंगेर, 2 अप्रैल। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बड़ी सफलता मिली है। ब्यूरो की टीम ने मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में कार्यरत विधि शाखा के प्रशाखा पदाधिकारी (पेशकार) मुकेश कुमार को 1 लाख 70 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, यह कार्रवाई 2 अप्रैल 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या-38/26 के तहत की गई। आरोपी को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, मुंगेर के विधि शाखा कक्ष के सामने से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसे विशेष न्यायालय (निगरानी), भागलपुर में पेश किया जाएगा।
कैसे हुआ खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के पंचवीर गांव निवासी नंदकिशोर प्रसाद सुमन की शिकायत पर हुआ। परिवादी ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि मुकेश कुमार एक जमीन विवाद से जुड़े मामले में उनके पक्ष में फैसला कराने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे थे।
बताया गया कि तीन कट्ठा चार धूर सरकारी जमीन से जुड़े एक मामले में डीसीएलआर, बलिया द्वारा पहले ही एक पक्ष के हक में आदेश दिया जा चुका था। इसके खिलाफ परिवादी ने अपील दायर की थी। आरोप है कि फैसला सरकार के पक्ष में करने से परिवादी को लाभ होता, जिसके एवज् में पेशकार द्वारा 1.70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
जांच के बाद कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम (धावादल) का गठन किया गया। टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार पर सख्ती जारी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ 38 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से 33 ट्रैप केस हैं, जिनमें 30 अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में अब तक कुल 11.99 लाख रुपये रिश्वत की राशि बरामद की गई है।
वहीं, वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप केस दर्ज किए गए थे, जिनमें 37.80 लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। इससे स्पष्ट है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार कार्रवाई जारी है।
निगरानी ब्यूरो की इस कार्रवाई को सरकार की ‘भ्रष्टाचार मुक्त बिहार’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।