NEWS PR डेस्क: पटना, 10 अप्रैल। बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलने वाली है। राज्य सरकार के ‘डिजिटल क्रांति’ विजन के तहत सभी 141 निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस रजिस्ट्री के लिए तैयार कर लिया गया है। तकनीकी संसाधनों से लैस ये दफ्तर अब आदेश मिलते ही नई व्यवस्था लागू करने को तैयार हैं।
नई प्रणाली लागू होने के बाद आम लोगों को सबसे बड़ी राहत मिलने वाली है। अब जमीन की खरीद-बिक्री के लिए भारी-भरकम फाइलों और लंबी कतारों का झंझट खत्म होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से तेज, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सकेगी।
सरकार के निर्देश पर कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि तकनीक के इस्तेमाल में किसी तरह की परेशानी न हो। बगहा निबंधन कार्यालय के सब रजिस्ट्रार अंबुज कुमार कुणाल के मुताबिक, कार्यालय में कंप्यूटर, स्कैनर और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं स्थापित कर दी गई हैं।
इस नई व्यवस्था में डिजिटल सिग्नेचर और बायोमेट्रिक सत्यापन का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। पहले इसे 1 अप्रैल से लागू करने की योजना थी, लेकिन फिलहाल विभागीय आदेश का इंतजार है। आदेश मिलते ही राज्यभर में इसे लागू कर दिया जाएगा।
पेपरलेस रजिस्ट्री का एक बड़ा उद्देश्य भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना भी है। अब रजिस्ट्री के लिए बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी और पूरी प्रक्रिया सीधे सिस्टम के जरिए पूरी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद समय की बचत के साथ रिकॉर्ड भी अधिक सुरक्षित रहेंगे। दस्तावेजों की स्कैनिंग और ऑनलाइन स्टोरेज के कारण जरूरत पड़ने पर सर्टिफाइड कॉपी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, जमीन से जुड़े नक्शे और खतियान का मिलान भी तेजी से किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत जमीन से जुड़े कामकाज को आसान, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।