बिहार की राजनीति में 7 मई का दिन बेहद अहम होने जा रहा है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार करने वाले हैं। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में प्रस्तावित इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।
बड़े बदलाव की फिलहाल कोई जरूरत नहीं दिखती
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने संकेत दिया है कि पिछली सरकार का फॉर्मूला इस बार भी काफी हद तक बरकरार रह सकता है। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के बीच पहले जो संतुलन था, उसमें बड़े बदलाव की फिलहाल कोई जरूरत नहीं दिखती। चिराग पासवान के मुताबिक, पिछली सरकार में भाजपा और जदयू कोटे के कुछ पद खाली रह गए थे, जिन्हें इस बार भरा जा सकता है। ऐसे में संभावना है कि दोनों बड़े दल अपने-अपने कोटे से ज्यादा मंत्रियों को शामिल करें।

अगर पिछली संरचना पर नजर डालें तो भाजपा के पास दो उपमुख्यमंत्रियों समेत 14 मंत्री थे, जबकि जदयू के खाते में मुख्यमंत्री सहित 9 मंत्री थे। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 2 मंत्री पद मिले थे, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक-एक मंत्री पद मिला था। माना जा रहा है कि इसी संतुलन के आधार पर नई टीम तैयार की जाएगी।
पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका
सूत्रों के अनुसार, इस बार कुछ पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका दिया जा सकता है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना है।