बिहार में बेलगाम साइबर अपराध, 11 हजार से ज्यादा मामले लंबित; सिर्फ 8 अपराधियों को मिली सजा

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 09 मई। बिहार में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अपराधियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। National Crime Records Bureau (NCRB) की वर्ष 2024 की वार्षिक रिपोर्ट ने राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बिहार में साइबर अपराध के मामलों में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में जहां 4,450 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 6,380 तक पहुंच गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि कुल 11,764 लंबित मामलों में पुलिस केवल 12 मामलों का ही अंतिम निष्पादन कर सकी। इनमें भी महज 8 अपराधियों को सजा मिल पाई, जिससे साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि बिहार पुलिस अधिकांश मामलों की जांच पूरी करने में भी सफल नहीं हो पाई है। कुल लंबित मामलों में करीब 87 प्रतिशत मामलों का अनुसंधान अब तक अधूरा है। पुलिस ने केवल 917 मामलों में चार्जशीट दाखिल की, जबकि 524 केस साक्ष्य के अभाव में बंद कर दिए गए। वर्तमान में 10,283 मामले अब भी जांच के स्तर पर लंबित हैं।

साइबर अपराध के स्वरूप पर नजर डालें तो ऑनलाइन ठगी सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। राज्य में दर्ज 3,771 मामले ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े रहे। महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध के 864 मामले सामने आए, जिनमें ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन छेड़खानी और फर्जी प्रोफाइल बनाकर उत्पीड़न जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा आपसी दुश्मनी से जुड़े 1,167 मामले, फिरौती के 187 और यौन शोषण के 96 मामले भी दर्ज किए गए।

पुलिस ने वर्ष 2024 में कुल 1,333 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, लेकिन सजा की दर बेहद कम रही। वहीं अदालतों में भी मामलों का अंबार बढ़ता जा रहा है। बिहार में साइबर अपराध से जुड़े 5,782 मामले ट्रायल के इंतजार में लंबित हैं। इनमें से 4,865 मामले वर्ष 2023 से ही अदालतों में लंबित पड़े हैं। पूरे देश में करीब 98 हजार साइबर अपराध मामले ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की कमी, आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक संसाधनों का अभाव और जांच एजेंसियों पर बढ़ता दबाव साइबर मामलों के निपटारे में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। जानकारों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो आम लोगों का साइबर थानों और पुलिस व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि बिहार में साइबर अपराध केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि तेजी से उभरती प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती बन चुका है, जिसके समाधान के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकता है।

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