बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारी तेज, मंत्री बोले- तय समय पर होगा मतदान

गांवों में चुनावी माहौल अभी से बनने लगा है। संभावित उम्मीदवार मतदाताओं के बीच सक्रिय हो गए हैं और पंचायत स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। अब सभी की नजर 9 जून को जारी होने वाली अंतिम जनसंख्या सूची और उसके बाद आने वाले आरक्षण रोस्टर पर टिकी हुई है।

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 11 मई। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गांवों में मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्य पद के संभावित उम्मीदवारों ने अभी से जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच राज्य सरकार की ओर से चुनाव को लेकर बड़ा संकेत मिला है। पंचायती राज मंत्री Deepak Prakash ने स्पष्ट किया है कि बिहार पंचायत चुनाव 2026 निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे।

मंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं और पंचायती राज विभाग के साथ राज्य निर्वाचन आयोग भी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने में जुटा हुआ है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पंचायत स्तर पर जनसंख्या आंकड़ों का प्रकाशन किया जा रहा है। इसके बाद लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा और 9 जून को अंतिम जनसंख्या सूची प्रकाशित की जाएगी।

दीपक प्रकाश के अनुसार अंतिम जनसंख्या प्रकाशन के बाद आरक्षण रोस्टर तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही मल्टीपोस्ट ईवीएम की तैयारी और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी निर्वाचन आयोग काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।

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हालांकि चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि अक्टूबर 2026 के आसपास मतदान कराया जा सकता है। राज्य में 8 हजार से अधिक पंचायतों में चुनाव होने हैं, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही हैं।

इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की संभावना भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जनसंख्या के नए आंकड़ों के आधार पर कई पंचायतों का आरक्षण रोस्टर बदल सकता है। ऐसे में जो सीटें पहले सामान्य थीं, वे आरक्षित हो सकती हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों की स्थिति भी बदल सकती है। इससे चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

गांवों में चुनावी माहौल अभी से बनने लगा है। संभावित उम्मीदवार मतदाताओं के बीच सक्रिय हो गए हैं और पंचायत स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। अब सभी की नजर 9 जून को जारी होने वाली अंतिम जनसंख्या सूची और उसके बाद आने वाले आरक्षण रोस्टर पर टिकी हुई है।

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