NEWS PR डेस्क: पटना, 17 मई। जदयू के वरिष्ठ नेता एवं मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक संघर्ष, सामाजिक बदलाव और विकास यात्रा को संरक्षित करने के उद्देश्य से “नीतीश आर्काइव” परियोजना की शुरुआत की है। पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह केवल एक दस्तावेजी परियोजना नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास को सहेजने की एक ऐतिहासिक पहल है।
नीरज कुमार ने कहा कि “नीतीश आर्काइव” का उद्देश्य मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विचारों, निर्णयों, संघर्षों और समाज परिवर्तन की यात्रा को आने वाली पीढ़ियों तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि “नीतीशवाद” सामाजिक न्याय, विकास, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और बिहार की अस्मिता पर आधारित एक समावेशी वैचारिक धारा है।

उन्होंने बताया कि यह पहल महात्मा गांधी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर की वैचारिक परंपरा को आधुनिक प्रशासनिक सोच और विकास मॉडल के साथ जोड़ने का प्रयास है। नीरज कुमार ने कहा कि “नीतीशवाद” इन्हीं विचारों को धरातल पर उतारने का नाम है।
“नीतीश आर्काइव” के माध्यम से संसद, बिहार विधानमंडल, जनसभाओं और मीडिया संवादों से जुड़े पुराने वीडियो, समाचार लेख, ऐतिहासिक दस्तावेज, तस्वीरें और व्यक्तिगत संस्मरणों का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही आम नागरिकों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विशेषज्ञों की स्मृतियों को भी वीडियो डॉक्यूमेंटेशन के रूप में संरक्षित किया जाएगा।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनके पास नीतीश कुमार से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो, दस्तावेज या व्यक्तिगत संस्मरण हैं, वे इस परियोजना से जुड़कर अपनी सामग्री साझा कर सकते हैं। इसके लिए ईमेल, व्हाट्सएप और वेबसाइट पोर्टल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यदि किसी के पास व्यक्तिगत स्मृतियां हैं, तो टीम उनके वीडियो रिकॉर्डिंग की भी व्यवस्था करेगी।
परियोजना के तहत “नीतीश आर्काइव यात्रा” भी चलाई जाएगी। इसके अंतर्गत एक विशेष टीम अगले नौ महीनों तक बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ी महत्वपूर्ण यादों, तस्वीरों, वीडियो और दस्तावेजों को एकत्रित करेगी।
नीरज कुमार ने कहा कि इतिहास में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक स्मृतियां समय के साथ खो गईं। “नीतीश आर्काइव” उसी ऐतिहासिक भूल को सुधारने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाले वर्षों में युवाओं, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री साबित होगी।