नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचे मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, आधुनिक सुविधाओं और ‘नेट जीरो’ मॉडल की सराहना की

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: नालंदा, 18 मई। राजगीर स्थित विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के नव-निर्मित परिसर का शुक्रवार को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पर्यावरण अनुकूल ‘नेट जीरो’ मॉडल की जानकारी ली। भ्रमण के दौरान नालंदा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय पहुंचने पर मुख्य सचिव का स्वागत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा किया गया। इसके बाद उन्हें एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान शैक्षणिक ढांचे से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अध्ययन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन तथा बौद्ध अध्ययन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।

भ्रमण के दौरान मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक पुस्तकालय, सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम, योग परिसर और शैक्षणिक भवनों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राचीन नालंदा की वास्तुकला और आधुनिक तकनीक के संगम की सराहना करते हुए इसे बिहार के लिए गर्व का विषय बताया।

मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित 6.5 मेगावाट सौर ऊर्जा फार्म, बायोगैस संयंत्र और जल संचयन प्रणाली में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का ‘नेट जीरो’ कार्बन फुटप्रिंट मॉडल राज्य के अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

अधिकारियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रत्यय अमृत ने कहा कि नालंदा केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए ज्ञान और शिक्षा का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि यह नव-निर्मित परिसर प्राचीन विरासत और आधुनिक नवाचार का शानदार उदाहरण है। राज्य सरकार विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस दौरान जिलाधिकारी नालंदा ने मुख्य सचिव को विश्वविद्यालय परिसर के आसपास चल रहे विकास कार्यों और आधारभूत संरचनाओं की भी जानकारी दी। भ्रमण के अंत में मुख्य सचिव ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में नालंदा विश्वविद्यालय दक्षिण-पूर्व एशिया सहित विश्व के अन्य देशों के साथ भारत के शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

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