NEWS PR डेस्क: पटना, 24 मई। बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में अब समर्थ पोर्टल को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
राजभवन की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत नामांकन, परीक्षा प्रबंधन, रिजल्ट प्रकाशन, शिक्षक एवं कर्मचारी प्रबंधन, उपस्थिति निगरानी, अवकाश प्रबंधन, सेवा संबंधी कार्य और वेतन भुगतान जैसे सभी कार्य समर्थ पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे।

राज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी विश्वविद्यालयों को समर्थ पोर्टल के सभी मॉड्यूल अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे। इसके साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालय में पोर्टल के संचालन और निगरानी के लिए बिहार लोक भवन की ओर से एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। वहीं सतर्कता निगरानी के लिए मुख्य सतर्कता अधिकारी भी नामित किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से कुलाधिपति ने विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी को गंभीरता से लेते हुए रिक्त पदों की सूची बिहार लोक भवन को भेजने का आदेश कुलपतियों को दिया है।

जानकारी के अनुसार, राज्य के विश्वविद्यालयों में करीब छह हजार सहायक प्राध्यापकों और सात हजार से अधिक कर्मचारियों के पद फिलहाल रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए भी जल्द कार्रवाई की बात कही गई है।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों को सरकार से मिलने वाले अनुदान की राशि के उपयोग का पूरा हिसाब और उपयोगिता प्रमाण-पत्र नियमित रूप से उपलब्ध कराना होगा। राज्यपाल ने कहा कि सार्वजनिक धन के उपयोग के लिए विश्वविद्यालय पूरी तरह जवाबदेह होंगे।
राजभवन के इस फैसले को बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।