औरंगाबाद हादसे में 102 एम्बुलेंस सेवा बनी जीवनरक्षक, 20 से अधिक घायलों को समय पर मिला उपचार

NH-19 पर भीषण सड़क हादसे के बाद 12 एम्बुलेंसों ने संभाला मोर्चा, गोल्डन ऑवर में मिला इलाज।

Rashmi Tiwari
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बिहार के औरंगाबाद जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) पर रविवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में आंध्र प्रदेश के तीन श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा जितना भयावह था, उतनी ही तेजी से राहत और बचाव कार्य भी शुरू किया गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा सक्रिय हो गई और समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाकर कई घायलों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले से श्रद्धालुओं का एक दल धार्मिक यात्रा पर निकला था। श्रद्धालु पुरी, देवघर और बोधगया में दर्शन करने के बाद वाराणसी जा रहे थे। इसी दौरान औरंगाबाद के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित भवानी लाइन होटल के समीप उनकी टूरिस्ट बस सड़क किनारे खड़े एक ट्रक-ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई 102 एम्बुलेंस सेवा
दुर्घटना की सूचना मिलते ही 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। औरंगाबाद जिले के क्लस्टर लीडर (सीएल) कवि राज ने हालात की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान का नेतृत्व किया।उन्होंने आसपास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सदर अस्पताल से करीब 12 एम्बुलेंसों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया। कुछ ही देर में एम्बुलेंस और स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंच गए तथा घायलों को प्राथमिक उपचार देते हुए अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया।

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गोल्डन ऑवर में मिला इलाज, बचीं कई जानें
102 एम्बुलेंस सेवा के ईएमटी और पायलटों ने पूरी तत्परता और समर्पण के साथ राहत कार्य संचालित किया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को पहले औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गया स्थित मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया।स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के बाद का पहला घंटा यानी “गोल्डन ऑवर” मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने के कारण कई गंभीर घायलों की स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
स्थानीय लोगों और प्रशासन ने भी निभाई अहम भूमिका
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस और ट्रक-ट्रेलर को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और चालक की असावधानी को दुर्घटना का संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
त्वरित प्रतिक्रिया हमारी प्राथमिकता: ऑपरेशन मैनेजर
इस संबंध में 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा के ऑपरेशन मैनेजर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना सेवा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि औरंगाबाद हादसे में एम्बुलेंस नेटवर्क, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के बेहतर समन्वय के कारण घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सका।
राज्यभर में जीवनरक्षक साबित हो रही है 102 सेवा
जेन प्लस और राज्य सरकार के सहयोग से संचालित 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा बिहार के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने का कार्य कर रही है। औरंगाबाद की इस दुखद घटना में भी सेवा की तत्परता और प्रभावी प्रबंधन ने कई घायलों को नई जिंदगी देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। औरंगाबाद से रूपेश पत्रकार की रिपोर्ट

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