NEWS PR डेस्क: लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

आज लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगातार दूसरे दिन चर्चा होनी है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने से जुड़े इस विधेयक पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी दोपहर करीब 12:30 बजे अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगे।
लोकसभा में नौ घंटे तक हुई थी चर्चा
बता दें कि मंगलवार को लोकसभा में इस विधेयक पर दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक करीब नौ घंटे तक चर्चा चली। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। वहीं, विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि जब पेपर लीक की घटनाएं पहले ही सामने आ चुकी हैं, तो सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।
प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर भी हुआ हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर भी सदन में हंगामा हुआ। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई से जुड़े जोशी के पुराने बयान का मुद्दा उठाते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े किए। हालांकि, उनकी कुछ टिप्पणियों को बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी संसद परिसर में सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्रालय को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया है, जिसने बलात्कार के दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया
पेपर लीक रोकने के लिए 2024 में बना था कानून
केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ लागू किया था। इस कानून के तहत पेपर लीक, परीक्षा में नकल कराने, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट तैयार करने और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी जैसे मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
दोषियों के लिए कड़े प्रावधान
मौजूदा कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था या एजेंसी के अधिकारी अगर इस तरह के अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें 3 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
