NEWS PR डेस्क: केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री Chirag Paswan ने सोमवार को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ‘सैपलिंग संवाद-2026’ का उद्घाटन किया। “अन्लॉकिंग वैल्यू: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय नीति संवाद 9 और 10 जून तक चलेगा।
इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। सम्मेलन में दक्षिण एशियाई देशों के नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, विकास भागीदार और नवप्रवर्तक सहित करीब 200 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करना और रोजगार आधारित टिकाऊ खाद्य प्रणाली विकसित करना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक मजबूत सेतु है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभरता हुआ बताते हुए कहा कि तकनीक, मूल्यवर्धन और क्षेत्रीय सहयोग से दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

गुजरात सरकार के कृषि मंत्री Jitu Vaghani ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का इंजन बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार, मूल्यवर्धन और आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम बन सकता है। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान की स्थापना का समर्थन भी किया।
कार्यक्रम में विश्व बैंक, गेट्स फाउंडेशन, नाबार्ड, आईटीसी, नेस्ले, बायर, राबोबैंक और फूड इंडस्ट्री एशिया सहित कई वैश्विक और भारतीय संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा हो रही है, जिनमें कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी नवाचार, छोटे प्रसंस्करणकर्ताओं का औपचारिककरण और निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार भारत में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों में मूल्यवर्धन की बड़ी संभावनाओं की पहचान की गई है।
कार्यक्रम के साथ एक नवाचार मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, स्मार्ट प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और टिकाऊ पैकेजिंग से जुड़े आधुनिक समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
सरकार का मानना है कि यह संवाद दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन को नई गति देगा तथा क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करेगा।
