NEWS PR डेस्क: मोतिहारी नगर निगम एक बार फिर टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवादों के घेरे में आ गया है। नगर निगम द्वारा आयोजित डिज्नीलैंड मेले के टेंडर में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों की मिलीभगत से राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पूर्व पार्षद का गंभीर आरोप
पूर्व पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 2025 में 30 दिनों के डिज्नीलैंड मेले का टेंडर 54 लाख रुपये में हुआ था, जबकि इस वर्ष 41 दिनों के लिए वही टेंडर मात्र 14 लाख 62 हजार 500 रुपये में कर दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मेले की अवधि बढ़ी है, तो राजस्व में इतनी भारी गिरावट कैसे संभव है। पूर्व पार्षद ने इसे एक “मैनेज्ड सेटिंग” बताते हुए कहा कि अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कथित बिचौलियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
आरोपों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया को कुछ विशेष लोगों के पक्ष में मोड़कर उन्हें लाभ पहुंचाया गया है। साथ ही आशंका जताई जा रही है कि नगर निगम की करोड़ों रुपये की अन्य विकास योजनाओं में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। शहर में यह भी चर्चा है कि टेंडर प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण सरकारी राजस्व को लगातार नुकसान हो रहा है।
नगर आयुक्त का बयान
इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त आशीष कुमार ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है, लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने विस्तृत बयान देने से इनकार कर दिया। उनकी यह चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है।मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस आधार पर टेंडर राशि में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मोतिहारी से संतोष राउत की रिपोर्ट
