पूर्वी चंपारण में विकास कार्यों का अनोखा मामला, खेतों के बीच खड़ी पुलियाएं

जहां सड़क नहीं, वहां पुलिया! पूर्वी चंपारण में विकास कार्यों की उपयोगिता पर उठे गंभीर सवाल।

Rashmi Tiwari
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NEWS PR डेस्क: पूर्वी चंपारण जिले में विकास कार्यों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केसरिया और पताही प्रखंड में बिना किसी सड़क या संपर्क मार्ग के ही कई पुलियाओं का निर्माण किए जाने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर इन पुलियाओं के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार, केसरिया प्रखंड की ढेकहा पंचायत के वार्ड संख्या 4 और 11 में गंडक नदी के कछार क्षेत्र में कई पुलियाओं का निर्माण कराया गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन पुलियाओं तक पहुंचने के लिए कोई सड़क या संपर्क मार्ग मौजूद नहीं है। ऐसे में इन निर्माण कार्यों की उपयोगिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इसी तरह पताही प्रखंड की पूर्वी पंचायत के सरेह क्षेत्र में भी बिना एप्रोच रोड के कई पुलियाएं बनाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन निर्माण कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, जबकि इनका कोई प्रत्यक्ष उपयोग दिखाई नहीं देता। मामला सामने आने के बाद तकनीकी स्वीकृति और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सड़क के पुलिया निर्माण की स्वीकृति कैसे मिली और निर्माण कार्यों की जांच किस आधार पर की गई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल कनीय अभियंता (JE) और सहायक अभियंता (AE) पर है कि उन्होंने बिना स्थल निरीक्षण किए ही इस कार्य की मापी पुस्तिका (MB) को कैसे दर्ज और स्वीकृत कर दिया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मनरेगा योजना भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए कमाई का जरिया बन चुकी है।

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वहीं, पताही प्रखंड के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच की गई है। निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे निर्माण कार्य मिले हैं, जिनकी उपयोगिता और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि दो दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर वरीय अधिकारियों को सौंपी जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने मनरेगा योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।मोतिहारी से संतोष राउत की रिपोर्ट

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