NEWS PR डेस्क: केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रपति भवन में पिछले कुछ दिनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई अलग-अलग मुलाकातों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की। इससे दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। हालांकि दोनों बैठकों के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इन्हें संभावित कैबिनेट विस्तार या फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं।
इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपना इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भाजपा ने उन्हें दोबारा सदन में नहीं भेजा, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। कुरियन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत वे अगले छह माह तक सांसद बने बिना मंत्री बने रह सकते हैं। बिट्टू ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा के ‘वन मैन, वन पोस्ट’ सिद्धांत के तहत कुछ नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। हाल ही में हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वे केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। इसी तरह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के साथ केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भी हैं। ऐसे में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने को लेकर बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा भाजपा और एनडीए के बढ़ते राजनीतिक दायरे को भी संभावित फेरबदल का एक कारण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में एनडीए के करीब आए नए सहयोगियों और नेताओं को सरकार या संगठन में प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। साथ ही संसद में संख्या बल मजबूत करने और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए भी नए समीकरण बनाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वर्ष पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। ऐसे में यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो उसका असर चुनावी रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से अभी तक किसी संभावित फेरबदल को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद राष्ट्रपति भवन में हुई लगातार उच्चस्तरीय मुलाकातों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने सियासी हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम और संभावित आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।
