NEWS PR डेस्क: पटना,06 जुलाई। बिहार सरकार जिला स्तर पर लंबित या असंतोषजनक तरीके से निपटाए गए मामलों की समीक्षा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है। 14 जुलाई से राजधानी पटना में राज्य स्तरीय ‘सहयोग कार्यक्रम’ का शुभारंभ होगा। इस पहल के तहत ऐसे नागरिकों को अपनी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा, जिन्हें जिला प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों की कार्रवाई से संतोष नहीं मिला है।
सरकार का उद्देश्य उन मामलों की दोबारा समीक्षा करना है, जिनमें शिकायतकर्ताओं का मानना है कि उनकी समस्या का निष्पक्ष समाधान नहीं हुआ। इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपनी बात राज्य स्तर तक पहुंचाने का एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक लोगों को बिहार सरकार के आधिकारिक सहयोग पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होगा। आवेदन के दौरान जिला स्तर पर दर्ज शिकायत का रेफरेंस नंबर और पहले से पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी के सत्यापन के बाद ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा। सभी आवेदनों की जांच के बाद पात्र लोगों का चयन किया जाएगा और चयनित आवेदकों को कार्यक्रम की तारीख, समय और स्थान की जानकारी एसएमएस के माध्यम से भेजी जाएगी।

अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पहल का मकसद सिर्फ शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि जिला स्तर पर हुई कार्रवाई की प्रभावशीलता का आकलन करना भी है। यदि किसी मामले में लापरवाही या अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी समीक्षा के दायरे में आ सकती है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से जिला स्तर के अधिकारियों पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ेगा, क्योंकि असंतुष्ट नागरिकों को अब राज्य स्तर पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
‘जनता दरबार’ की अवधारणा का नया स्वरूप
बिहार में आम लोगों की शिकायतें सुनने की परंपरा पहले भी रही है। पूर्व में मुख्यमंत्री स्तर पर आयोजित जनता संवाद कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों की समस्याएं सुनी जाती रही हैं। हालांकि, कई बार शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आवेदन देने के बाद भी निचले स्तर पर मामलों का प्रभावी निष्पादन नहीं हो पाया। नई व्यवस्था को उसी अनुभव के आधार पर अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ सरकार की जनसंपर्क रणनीति का भी हिस्सा हो सकती है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है, तो इससे आम लोगों का भरोसा बढ़ने के साथ-साथ शासन और प्रशासन के बीच समन्वय भी मजबूत हो सकता है। 14 जुलाई को होने वाला पहला राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम इस नई व्यवस्था की प्रभावशीलता की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
