NEWS PR डेस्क: पटना, 18 जुलाई। बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद सरकारी डिग्री कॉलेजों का प्रशासनिक ढांचा, शिक्षकों की सेवा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों की भूमिका में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार राज्य के करीब 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाया जाएगा। वर्तमान में ये कॉलेज 12 राज्य विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक दायरे में संचालित होते हैं। नए कानून के लागू होने के बाद इन कॉलेजों के संचालन, प्रशासन और नीतिगत निर्णयों की जिम्मेदारी सीधे विभाग के पास होगी।
सरकार की योजना के तहत विश्वविद्यालयों का मुख्य फोकस स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों तक सीमित रहेगा, जबकि स्नातक स्तर के कॉलेजों का प्रबंधन पूरी तरह सरकार संभालेगी।
विधेयक में शिक्षकों की सेवा शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव है। नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी निर्णय अब विश्वविद्यालयों के बजाय उच्च शिक्षा विभाग करेगा। इसके लिए पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में संशोधन की तैयारी चल रही है।

शिक्षकों के आचरण को लेकर भी नए प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। मसौदे के अनुसार कॉलेज शिक्षकों को किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, प्रचार या पक्ष में लेखन करने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है।
सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव प्रस्तावित है। नए नियमों के तहत नेट (NET) और संबंधित विषय में स्नातकोत्तर (PG) की डिग्री न्यूनतम योग्यता होगी, जबकि पीएचडी को अनिवार्य पात्रता से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा नई व्यवस्था लागू होने के बाद डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनने का रास्ता भी बंद हो सकता है। अभी तक अनुभव और पदोन्नति के आधार पर यह अवसर उपलब्ध था, लेकिन प्रस्तावित कानून में इस व्यवस्था को समाप्त करने की बात कही गई है।
सरकार प्रत्येक जिले में एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति करने की भी योजना बना रही है। यह अधिकारी जिले के सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों, प्रशासनिक व्यवस्था और अन्य कार्यों की निगरानी करेगा।
यदि यह विधेयक विधानमंडल से पारित हो जाता है, तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कॉलेजों का संचालन अधिक जवाबदेह, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
