नेपाल के तिब्बत सीमा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी का जलप्रवाह अचानक बढ़ा, सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता,!

Muskan Gupta

NEWS PR डेस्क ;— पश्चिम चंपारण के बगहा से है जहाँ बुधवार की सुबह सीमावर्ती नेपाल के तिब्बत-सीमा वाले इलाके में स्थित भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया। लिहाजा नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका तेज़ हो गई है । दरअसल चीन में बांध टूटने के बाद नेपाल के त्रिशूली नदी में उफ़ान है यहीं वज़ह है की अब नेपाल से निकलने वाली नारायणी गंडक नदी के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी के साथ हीं बाढ़ की सम्भावना प्रबल हो गईं है लिहाजा,

पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने ख़ुद बगहा के नदी तट क्षेत्रों में पहुंचकर गंडक नदी के किनारे निगरानी बढ़ा दी है। वहीं जल संसाधन विभाग की ओर से वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज़ समेत दियारा के निचले इलाकों औऱ बांधों पर सतत निगरानी की जा रहीं है । बताया जा रहा है की बगहा में सीओ औऱ थानाध्यक्ष नदी तट पर निगरानी के साथ मुनादी करवाकर लोगों को सतर्क औऱ सज़ग रहने की अपील क़र रहें हैं !

वहीं मधुबनी प्रखंड के चिउरही औऱ सिसई पंचायत में लोग अपने सामान लेकर मवेशियों के साथ ऊँचे औऱ सुरक्षित स्थानों की ओर रुख़ अख्तियार क़र रहें हैं जबकि चकदहवा झंडू टोला औऱ बीन टोली में भी गाँव खाली करवाने की कवायद में प्रशासन जुटा हुआ है। हालांकि जलस्तर अभी रात के 11 बजे 1 लाख 50 हज़ार 200 क्यूसेक के वाटर डिस्चार्ज चल रहा है जों तक़रीबन 4-5 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की संभावना हो सकती है

लिहाजा आपदा की हर घड़ी से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट पर है। जानकारी के मुताबिक नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है। नेपाली अधिकारियों ने जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के पीछे ग्लेशियल झील के फटने से आई बाढ़ (GLOF) की संभावना भी जताई है। ,

नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (DHM) के मुताबिक भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पानी का बहाव काफ़ी तेज़ी से बढ़ा है। ख़ास बात यह है की त्रिशूली नदी आगे चलकर नारायणी नदी में मिल जाती है, जिसे भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी के नाम से जाना जाता है । यहीं वज़ह है की नेपाल के हालात को देखते हुए, पश्चिम चंपारण के डीएम तरनजोत सिंह ने अधिकारियों और कार्यकारी इंजीनियरों को गंडक के किनारे बसे गांवों और नेपाल से सटे इलाकों में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। ज़िला प्रशासन ने कहा है कि जलस्तर और नदी के निचले इलाकों पर पड़ने वाले संभावित असर की लगातार निगरानी की जा रही है। नीजी नाव पूरी तरह बन्द क़र दिए गए हैं ,!

जबकि सरकारी नाव चालू रखें जाने की बात बगहा सीओ वसीम अकरम नें बताया है।

प्रशासन ने अधिकारियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए ज़रूरी तैयारी और इंतज़ाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गाँव से लेकर शहर तक अधिकारियों ने लोगों से अपील किया है कि वे घबराएं नहीं बल्कि सतर्क रहें । वही जिला प्रशासन द्वारा योगापट्टी , बगहा , मधुबनी , चिउरही मे जिला प्रशासन द्वारा सामुहिक किचन की शुरूवात कर दी गई है सभी को माईकिंग कर खाना खाने की बात कही जा रही है ताकी कोई भुखा ना रहे। गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है !

कि वे बिना वजह नदी के करीब न जाएं और,

अफवाहों के बजाय सिर्फ़ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, बिल्कुल भी लोग घबराये नहीं क्योंकि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है । बता दें की पश्चिम चंपारण ज़िला में दियारा के निचले और नदी तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे परिवार के सदस्यों, खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा के लिए पहले से इंतज़ाम कर लें । उनसे यह भी कहा गया है !

कि अगर जलस्तर बढ़ता है या प्रशासन कोई चेतावनी जारी करता है, तो वे तुरंत सभी निर्देशों का पालन करें ।

प्रशासन ने कहा है कि अभी घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है, लेकिन ज़ोर देकर कहा गया है कि गंडक नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहना चाहिए और सरकारी सलाहों का सख्ती से पालन करना चाहिए तभी हम औऱ आप आपदा की इस मुश्किल घड़ी औऱ होने वाली तबाही से बच सकते हैं !

पश्चिम चंपारण से मोहम्मद इम्तियाज की रिपोर्ट :—-

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