शहीदों के परिजनों को एक एकड़ जमीन देगी बिहार सरकार, विजय कुमार सिन्हा ने किया बड़ा ऐलान

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद जवानों के परिवारों के लिए एक मानवीय और सम्मानजनक पहल की है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी भूमि आवंटन की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी और सुगम बना दिया है। इस संबंध में विभाग की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि शहीदों के परिजन राज्य के लिए सम्मान के पात्र हैं और उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहीद के परिवार को उनके गृह प्रखंड में ही सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

सेना के साथ अन्य बलों के आश्रितों को भी मिलेगा लाभ

यह सुविधा केवल भारतीय सेना तक सीमित नहीं होगी। युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य बलों के शहीद कर्मियों के परिजन भी इस योजना के दायरे में आएंगे। इनमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड्स और असम राइफल्स शामिल हैं।

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पात्रता की शर्तें तय

सरकार द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, लाभ उन्हीं शहीदों के आश्रितों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम छह महीने की सेवा पूरी की हो और युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए हों। आवेदक का बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही सेलर्स, सोल्जर्स और एयरमेन बोर्ड की अनुशंसा तथा संतोषजनक सेवा का प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी रखी गई है कि आश्रित परिवार के पास पहले से कोई निजी आवासीय भूमि नहीं होनी चाहिए। भूमि बंदोबस्ती के बाद शुरुआती पांच वर्षों तक किसी भी प्रकार का वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा।

जिलाधिकारी करेंगे भूमि आवंटन

सरकारी जमीन के आवंटन का अधिकार जिलाधिकारियों के पास सुरक्षित रहेगा। यह सुविधा केवल ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध विवादमुक्त सरकारी भूमि पर लागू होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवंटित की जाने वाली भूमि भूदान, कब्रिस्तान, श्मशान, धार्मिक स्थलों या किसी भी न्यायिक विवाद से मुक्त होनी चाहिए।राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम शहीदों के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि साबित होगा और उनके परिवारों को सुरक्षित व सम्मानजनक भविष्य देने में मदद करेगा।

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