NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम सामने आने के बाद पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रिश्तों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। नई टीम में RSS और उसके छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े नेताओं की मौजूदगी पहले की तुलना में बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, नितिन नबीन की टीम में करीब 54 फीसदी पदाधिकारी ऐसे हैं, जिनका किसी न किसी रूप में संघ से जुड़ाव रहा है।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद रिश्तों पर उठे थे सवाल
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP का प्रदर्शन पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था। चुनाव से पहले पार्टी ने ‘400 पार’ का लक्ष्य रखा था, लेकिन BJP अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। इस प्रदर्शन के पीछे RSS के साथ कथित दूरी को भी एक वजह माना गया था हालांकि, BJP और RSS के बीच इस मुद्दे पर कभी खुलकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
रिपोर्ट में राजनीतिक जानकारों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव के दौरान RSS के जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता पहले जैसी नहीं रही। इसके बाद अब नितिन नबीन की नई टीम में संघ पृष्ठभूमि वाले नेताओं की बढ़ी संख्या को BJP और RSS के बीच संबंधों में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
नड्डा के समय 50% से कम थी संघ पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या
नितिन नबीन की टीम में करीब 54 प्रतिशत पदाधिकारियों के RSS से जुड़े होने की बात सामने आई है। इसके मुकाबले पूर्व BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की टीम में संघ से जुड़े पदाधिकारियों की संख्या 50 प्रतिशत से कम बताई गई थी। इस बदलाव को BJP की संगठनात्मक रणनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी अब जमीनी संगठन को मजबूत करने और RSS के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर अधिक जोर देती नजर आ रही है।
नड्डा के एक बयान के बाद बढ़ी थी दूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के एक बयान के बाद BJP और RSS के रिश्तों में दूरी की चर्चा शुरू हुई थी। नड्डा ने कहा था कि BJP को पहले RSS की जरूरत होती थी, लेकिन अब पार्टी अपने कामकाज को खुद संभालने में सक्षम है।
इसके बाद चुनाव के दौरान RSS की जमीनी सक्रियता को लेकर सवाल उठे। RSS का संगठनात्मक नेटवर्क BJP के लिए जमीनी स्तर पर माहौल बनाने और पार्टी के समर्थकों को मतदान के लिए सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दोनों संगठनों के बीच बेहतर समन्वय को BJP के लिए अहम माना जाता है।
अमित शाह के कार्यकाल में सबसे ज्यादा थी RSS की छाप
BJP की अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों में RSS और ABVP से जुड़े नेताओं की मौजूदगी का आंकड़ा देखें तो अमित शाह के अध्यक्षीय कार्यकाल में यह सबसे अधिक रही थी। शाह 2014 से 2019 तक BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इस दौरान पार्टी के शीर्ष पदों पर मौजूद करीब 78.7 प्रतिशत सदस्य RSS या ABVP से जुड़े हुए बताए गए हैं।
वहीं, राजनाथ सिंह के BJP अध्यक्ष रहने के दौरान 2005 से 2009 के बीच यह आंकड़ा करीब 77.41 प्रतिशत था। नितिन गडकरी के 2010 से 2013 के कार्यकाल में RSS या ABVP से जुड़े नेताओं की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई गई है।
इसके बाद जे.पी. नड्डा ने 20 जनवरी 2020 को अमित शाह के बाद BJP अध्यक्ष का पद संभाला। उनके कार्यकाल में संघ पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या कम हुई। अब जनवरी 2026 में BJP अध्यक्ष का पद संभालने वाले नितिन नबीन की नई टीम में यह संख्या फिर बढ़ी है।
नितिन नबीन का RSS से सीधा जुड़ाव नहीं
नितिन नबीन का खुद RSS से कोई सीधा जुड़ाव नहीं बताया गया है। उनके प्रोफाइल के मुताबिक उनका संघ से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है। लेकिन उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा पटना में RSS की शाखा में जाते थे। वह पटना पश्चिम से चार बार विधायक रह चुके हैं।

नई टीम में कई प्रमुख नेताओं का RSS कनेक्शन
नितिन नबीन की नई टीम में 13 उपाध्यक्षों में से कम से कम पांच नेताओं का RSS से किसी न किसी रूप में जुड़ाव रहा है। इनमें तीरथ सिंह रावत, राम माधव, लाल सिंह आर्य, एम. नागराजा और डॉ. मधुचंदा कर शामिल हैं।
तीरथ सिंह रावत RSS के प्रचारक रहे हैं और 1980 के दशक में ABVP में भी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। राम माधव का RSS से जुड़ाव बचपन से रहा है। लाल सिंह आर्य भी सात साल की उम्र से RSS की शाखा में जाने लगे थे। वहीं एम. नागराजा और डॉ. मधुचंदा कर ABVP से जुड़े रहे हैं।
संगठन में RSS की महत्वपूर्ण भूमिका बरकरार
नितिन नबीन ने अपनी नई टीम में बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बरकरार रखा है। इसके अलावा शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) का पद BJP और RSS के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
नई टीम के आठ महासचिवों में से कम से कम सात का RSS या ABVP से जुड़ाव रहा है। इनमें विनोद तावड़े, सुनील बंसल, हरीश द्विवेदी, संजय भाटिया, डॉ. सतीश पूनिया, बिप्लब कुमार और गजेंद्र पटेल शामिल हैं।
इसी तरह, नितिन नबीन की ओर से नियुक्त 16 सचिवों में से कम से कम छह का RSS या ABVP से संबंध रहा है। इनमें के. सुरेंद्रन, डॉ. प्रदीप वर्मा, डॉ. एम. वेंकटेशन, डॉ. स्वदेश सिंह, मनोज तिग्गा और जय प्रकाश शामिल हैं वहीं, चार मीडिया कन्वीनर और को-कन्वीनर में से तीन के भी संघ से जुड़े होने की बात कही गई है।
Gen Z और असंतुष्ट मतदाताओं पर BJP की नजर
नई संगठनात्मक रणनीति को आगामी चुनावी चुनौतियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, BJP अब 2024 जैसी स्थिति दोहराना नहीं चाहती और RSS को साथ लेकर जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
पार्टी के सामने इस समय Gen Z को साधने, असंतुष्ट मतदाताओं को दोबारा अपने साथ जोड़ने और बदलते राजनीतिक माहौल के हिसाब से अपनी रणनीति तैयार करने की चुनौती है। ऐसे में नितिन नबीन की नई टीम में RSS और ABVP से जुड़े नेताओं की बढ़ी मौजूदगी BJP और संघ के बीच संगठनात्मक तालमेल को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।